तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के अकादमिक जगत के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है. विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती शोधार्थी और वर्तमान में झारखंड के दुमका स्थित ए. एन. कॉलेज में वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अमर नाथ सिंह को पुन: झारखंड बायोडाइवर्सिटी बोर्ड (Jharkhand Biodiversity Board) का सदस्य नियुक्त किया गया है.
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, उनके नाम का विधिवत अनुमोदन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है. उनकी यह नियुक्ति अधिसूचना जारी होने की तिथि से अगले तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी. उल्लेखनीय है कि यह उनका दूसरा कार्यकाल है; इससे पूर्व भी वे वर्ष 2022 से 2025 तक बोर्ड के सदस्य के रूप में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं.
10 वर्षों तक कोयला मंत्रालय की शोध परियोजना में रहे सक्रिय
डॉ. अमर नाथ सिंह की अकादमिक पृष्ठभूमि अनुसंधान और नवाचार से समृद्ध रही है:
- शोध यात्रा: उन्होंने बीएन मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा एवं टीएमबीयू के पूर्व कुलपति प्रख्यात वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. (डॉ.) अवध किशोर राय के कुशल निर्देशन में कोयला मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजना में लगातार 10 वर्षों तक गहन शोध कार्य किया है.
- अकादमिक सेवा: वर्तमान में वे दुमका जिला मुख्यालय स्थित प्रतिष्ठित ए. एन. कॉलेज में वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष (HoD) के रूप में कार्यरत हैं.
पिछले कार्यकाल में उत्कृष्ट उपलब्धियां और प्रकाशित पुस्तकें
बोर्ड सदस्य के रूप में अपने पिछले तीन वर्षों के दौरान उन्होंने जैव विविधता के क्षेत्र में कई मील के पत्थर स्थापित किए:
- पुस्तक संपादन: जैव विविधता संरक्षण एवं इथनोबॉटनी (Ethnobotany) विषय के विविध आयामों पर उनके द्वारा संपादित तीन महत्वपूर्ण आईएसबीएन (ISBN) युक्त पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.
- आगामी प्रकाशन: आने वाले दिनों में उनके द्वारा संपादित तीन अन्य पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैं, जिनमें से एक विशेष पुस्तक के संपादक मंडल में झारखंड विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो भी शामिल हैं.
- युवाओं को अवसर: डॉ. सिंह के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं के लिए 'बायोडाइवर्सिटी कंजर्वेशन इंटर्नशिप प्रोग्राम' और 'झारखंड ग्रासरूट्स इनोवेशन इंटर्नशिप स्कीम' का सफल संचालन किया गया.
संथाल परगना के जंगलों में 'इको वारियर्स' का नेतृत्व
धरातल पर पर्यावरण संवर्धन के लिए डॉ. सिंह निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं:
- वृक्ष रक्षा बंधन अभियान: इको क्लब कोऑर्डिनेटर के रूप में वे 'इको वारियर्स' की टीम बनाकर संथाल परगना के आदिवासी बहुल गांवों के प्राकृतिक वनों को बचाने के लिए 'वृक्ष रक्षा बंधन' और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं.
- सामाजिक सरोकार: वन संरक्षण के साथ-साथ वे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में समय-समय पर पौधारोपण, पौधे, कंबल और छात्र-छात्राओं के बीच पाठ्य सामग्री का वितरण भी सुनिश्चित करते हैं.
पुनः बोर्ड का सदस्य बनाए जाने पर डॉ. अमर नाथ सिंह ने अपने गुरुजनों, मार्गदर्शकों, कॉलेज परिवार और मीडिया सहयोगियों के प्रति आभार जताया और संकल्प लिया कि वे झारखंड की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए अपनी वैज्ञानिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे.
