'प्रभात पड़ताल' की जमीनी रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा विभाग के इस ढुलमुल रवैये के कारण स्कूल के करीब 600 से अधिक छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है. डीईओ कार्यालय का सामान और फाइलों का अंबार लगे होने के कारण स्कूल का साइंस प्रैक्टिकल रूम, संगीत कक्ष, व्यायामशाला (जिम) और कॉमन रूम पूरी तरह बंद हैं, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक और शारीरिक विकास पूरी तरह ठप पड़ गया है.
ताले में बंद हैं प्रैक्टिकल रूम और खेल सामग्रियां
स्कूल के छात्र-छात्राओं ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि उन्हें विज्ञान (साइंस) विषयों के प्रैक्टिकल के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. प्रैक्टिकल के लिए निर्धारित विशेष कमरा डीईओ कार्यालय के नियंत्रण में है. केवल प्रैक्टिकल ही नहीं, बल्कि:
- शारीरिक विकास अवरुद्ध: खेल सामग्री कक्ष और इंडोर गेम्स (इनडोर खेल) के लिए आवंटित हॉल में भी पुराने कार्यालय का कबाड़ और सामान भरा पड़ा है.
- सह-शैक्षणिक गतिविधियां ठप: संगीत कक्ष और छात्रों के बैठने वाले कॉमन रूम पर भी ताला लटका है.
स्कूल के शिक्षकों ने दबी जुबान से स्वीकार किया कि सरकार की ओर से बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जो भी बुनियादी ढांचा और सामग्रियां भेजी गई हैं, वे कमरों के अभाव में धूल फांक रही हैं.
छात्राओं के स्वाभिमान से समझौता: एक टॉयलेट के भरोसे 600 बच्चे
डीईओ कार्यालय का कब्जा न हटने से स्कूल में सबसे नारकीय स्थिति छात्राओं की स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर बनी हुई है. छात्राओं के लिए बने टॉयलेट ब्लॉक पर भी ताला लगा हुआ है. विवश होकर स्कूल की छात्राएं लेडिज स्टाफ (महिला शिक्षिकाओं) के छोटे से टॉयलेट का उपयोग करने को मजबूर हैं. छात्राओं की संख्या सैकड़ों में होने और टॉयलेट मात्र एक होने के कारण वहां सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है. इस गंभीर मुद्दे पर स्कूल प्रबंधन कुछ भी खुलकर बोलने से कतरा रहा है.
600 से अधिक छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर
शिक्षकों से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नवस्थापित जिला स्कूल में वर्तमान में नामांकित छात्रों की संख्या काफी अच्छी है, जो नियमित रूप से स्कूल आते हैं:
- 11वीं कक्षा: साइंस में 120 और आर्ट्स में 110 विद्यार्थी.
- 12वीं कक्षा: साइंस और आर्ट्स दोनों में 120-120 विद्यार्थी.
- 9वीं व 10वीं कक्षा: क्रमशः 90 और 92 छात्र.
इतनी बड़ी संख्या में छात्र होने के बावजूद उन्हें एक छोटे से हिस्से में जैसे-तैसे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.
कहते हैं प्रिंसिपल: कमरों के बिना सुचारू संचालन असंभव
इस पूरे गतिरोध और छात्रों की परेशानी को लेकर जब नवस्थापित जिला स्कूल के प्राचार्य से बात की गई, तो उन्होंने लाचारी व्यक्त की:
"छात्रहित और विद्यालय के विकास के दृष्टिकोण से हमारे पास वर्तमान में कमरों की संख्या बेहद कम है. जब तक डीईओ कार्यालय के कब्जे वाले कमरे हमें वापस नहीं मिलते, तब तक सुचारू रूप से और मानकों के अनुरूप विद्यालय का क्रियान्वयन करवाना पूरी तरह असंभव प्रतीत हो रहा है. मैंने मौखिक रूप से जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस संबंध में अनुरोध किया है, ताकि कमरों को खाली कराकर छात्र-छात्राओं को उनका हक दिलाया जा सके." — शरतचंद्र पांडेय, प्रिंसिपल (नवस्थापित जिला स्कूल, खिरनी घाट)
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और खुद शिक्षा विभाग अपने ही अधीन आने वाले इस स्कूल को कब तक इस प्रशासनिक कब्जे से मुक्त करा पाता है, ताकि बच्चों की बाधित हो रही पढ़ाई दोबारा पटरी पर लौट सके.
