देवपुरा कंपनी बनायेगा हवाई अड्डा का रनवे, वर्क ऑर्डर देने से पहले कागजातों की जांच शुरू

हवाई अड्डा के रनवे निर्माण के लिए एजेंसी बहाल हो गयी है.

-ठंड का मौसम बीतने के बाद शुरू होगा रनवे का निर्माण, लागत 17.80 लाख रुपये ज्यादा आयेगी -वर्क ऑर्डर जारी करने के बाद ही होगा एजेंसी के साथ एग्रीमेंट वरीय संवाददाता, भागलपुर हवाई अड्डा के रनवे निर्माण के लिए एजेंसी बहाल हो गयी है. काम सीवान की देवपुरा इंफ्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को मिला है और ये चयनित एजेंसी ने सभी कागजात पथ निर्माण विभाग कार्य प्रमंडल, भागलपुर को जमा किया है. विभागीय पदाधिकारी ठेका से संबंधित कागजातों की जांच में जुट गयी है. कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि कागजातों की जांच सप्ताह भर में पूरी हो जायेगी और इसके बाद एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया जायेगा. एजेंसी के साथ एग्रीमेंट होगा. यह सभी प्रक्रिया दो-ढाई माह के अंदर पूरी की जायेगी. दरअसल, ये दो-ढाई माह ठंड का मौसम रहेगा और इसमें अलकतरा का काम उपयोगी नहीं रहता है. इस वजह से रनवे निर्माण का कार्य भी नहीं हो सकेगा. जबतक ठंड का मौसम बीतेगा, तबतक सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जायेगी. रनवे निर्माण पर 17.80 लाख ज्यादा आयेगा खर्च हवाई अड्डा के रनवे निर्माण के लिए विभाग ने करीब चार करोड़ का प्राक्कलन तैयार किया था लेकिन, अब इस निर्धारित राशि से 17.80 लाख ज्यादा खर्च होगा. इस राशि में ही रनवे के अप्रोच रोड का भी निर्माण कराया जायेगा. दरअसल, रनवे के निर्माण में मिर्जाचौकी की नहीं, बल्कि पाकुड़ की गिट्टी लगाई जायेगी. ज्यादा दूरी और हाइ क्वालिटी के मेटेरियल के शर्त पर विभाग ने लागत बढ़ायी है. इस रनवे से एयर टैक्सी उड़ाने की है योजना हवाई अड्डा के इस रनवे से ही एयर टैक्सी उड़ाने की योजना है. एयरलाइन सर्विस व एयर टैक्सी सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर जिलाधिकारी ने इस वर्ष मार्च में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा था. यह बताया गया था भागलपुर जिला एक बहुत पुराना व बड़ा वाणिज्यिक केंद्र के साथ-साथ पर्यटन के दृष्टिकोण से विविधताओं से भरा रहा है. यहां काफी संख्या में पर्यटक आते रहते हैं. हवाई अड्डा भागलपुर से वर्तमान में कोलकाता, पटना व दिल्ली के लिए हवाई सेवा जोड़ने की जरूरत है. हालांकि, पत्र भेजने के बाद भी अब कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. जानें, रनवे निर्माण पर अबतक किस विभाग से कितनी राशि हुई है खर्च भवन निर्माण विभाग : 1.33 करोड़ रुपये बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड : 34 लाख रुपये (लाउंज) बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड : 98 लाख (चहारदीवारी) भवन निर्माण विभाग : 98 लाख रुपये (रनवे व अप्रोच रोड) स्मार्ट सिटी कंपनी : 14.10 करोड़ रुपये

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By Prabhat Khabar News Desk

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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