भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी 8 से 12 अगस्त के दौरान दक्षिण बिहार के जिलों में मौसम का मिजाज बदला रहेगा. इस अवधि में आसमान में घने बादल छाए रहने और एक-दो स्थानों पर गरज-चमक व आंधी के साथ मध्यम स्तर की बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम की इस स्थिति को देखते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर ने किसानों के लिए समसामयिक कृषि परामर्श जारी किया है.
तापमान और हवा की गति का पूर्वानुमान
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार के अनुसार, आने वाले दिनों में दक्षिण बिहार के जिलों का मौसम कुछ इस प्रकार रहेगा. अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेंटीग्रेड और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड रहने का अनुमान है. सापेक्ष आर्द्रता (Humidity) सुबह के समय 85 से 90 प्रतिशत तथा दोपहर में 60 से 65 प्रतिशत तक बनी रहेगी. पूर्वानुमान की अवधि में 05 से 15 किमी/घंटा की गति से दक्षिण-पूर्वी हवा चलने की संभावना है.
कम वर्षा से धान के खेतों में खरपतवार का खतरा
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि कम वर्षा की स्थिति में धान के खेतों में खरपतवारों की वृद्धि अधिक हो सकती है. समय पर खरपतवार न निकालने से पौधों को मिलने वाली नमी, पोषक तत्व और हवा का संचार प्रभावित होता है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय पर निराई-गुड़ाई कर खरपतवारों को नियंत्रित करें. इससे मिट्टी में हवा का संचार बेहतर होगा और धान के पौधे तेजी से वृद्धि कर सकेंगे.
वैज्ञानिक तरीके से खरपतवार नियंत्रण के उपाय
डॉ. बीरेंद्र कुमार ने धान की फसल को नुकसान से बचाने के लिए रासायनिक दवाओं के छिड़काव से संबंधित विशेष तकनीकी जानकारी साझा की है. जिन खेतों में धान की रोपाई हुए 5 से 7 दिन हो चुके हैं, उनमें खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी का इस्तेमाल करना चाहिए. इस घोल में ब्यूटाक्लोर 3.0 लीटर, अथवा प्रेटिलाक्लोर 1.5 लीटर या फिर पेंडीमेथालिन 3.0 लीटर मिलाकर अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है.
