सिविल सर्जन कंपाउंड की 25 दुकानें और निजी क्लिनिक ढहाये गये

भागलपुर सिविल सर्जन कंपाउंड में न्यायालय के आदेश पर 25 दुकानें और एक निजी क्लिनिक पर बुलडोजर चला दिया गया. छह-सात माह पहले विरोध के कारण रुकी कार्रवाई, अब नोटिस के बाद शुरू हुई.

भागलपुर. न्यायालय के आदेश पर रविवार को सिविल सर्जन कंपाउंड में दखलदेहानी की कार्रवाई की गयी. प्रशासनिक टीम ने परिसर में बनी 25 दुकानों और एक निजी क्लिनिक को जेसीबी की मदद से ढहा दिया. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे. प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट अवर सांख्यिकी पदाधिकारी राजेश कुमार की निगरानी में पूरी कार्रवाई की गयी.

तीन जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर हटाया गया मलबा

दखलदेहानी की कार्रवाई के लिए तीन जेसीबी मशीनें लगायी गयी थीं. वहीं दुकानों और क्लिनिक के ढहाये जाने के बाद मलबा हटाने के लिए तीन से चार ट्रैक्टर लगाए गये थे. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार पूरे कॉम्प्लेक्स को खाली कराने और मलबा हटाने की कार्रवाई में दो से तीन दिन लगने की संभावना है.

छह-सात माह पहले विरोध के कारण रोकनी पड़ी थी कार्रवाई

इससे पहले भी न्यायालय के आदेश पर दखलदेहानी के लिए प्रशासनिक टीम सिविल सर्जन कंपाउंड पहुंची थी. उस समय दुकानदारों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए जमकर हंगामा किया था. कार्रवाई कर रही टीम के साथ हाथापाई की स्थिति भी उत्पन्न हो गयी थी.

विवाद बढ़ने पर तत्कालीन सदर एसडीएम विकास कुमार मौके पर पहुंचे थे. इसके बाद दखलदेहानी की कार्रवाई तत्काल रोक दी गयी थी. उस समय दुकानदारों ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई से पहले उन्हें नोटिस नहीं दिया गया था और दुकान एवं क्लिनिक से सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं मिला था.

नोटिस देने के बाद इस बार शुरू हुई कार्रवाई

07 अगस्त को न्यायालय के आदेश के बाद इस बार कार्रवाई से पहले संबंधित दुकानदारों को नोटिस दिया गया. उन्हें दुकान और क्लिनिक खाली करने तथा अपना सामान निकालने के लिए समय भी दिया गया. इसके बाद रविवार को पुलिस बल की मौजूदगी में दखलदेहानी की कार्रवाई शुरू की गयी.

27 डिसमिल जमीन के मालिकाना हक को लेकर दायर हुआ था टाइटल सूट

वादी वैद्यनाथ गुप्ता के अधिवक्ता के अनुसार सिविल सर्जन कंपाउंड की करीब 27 डिसमिल यानी नौ कट्ठा जमीन के मालिकाना हक को लेकर टाइटल सूट दायर किया गया था. अधिवक्ता के अनुसार 1978 से 1985 के बीच हुए सर्वे के दौरान संबंधित जमीन को बिहार सरकार की जमीन के रूप में दर्ज कर दिया गया था.

अधिवक्ता के अनुसार वैद्यनाथ गुप्ता ने वर्ष 1998 में न्यायालय में टाइटल सूट दायर किया था. वर्ष 2011 में न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया. इसके बाद सरकार की ओर से प्रथम अपील की गयी, लेकिन वहां भी सरकार की दलील खारिज हो गयी.

न्यायालय के आदेश के बाद हुई दखलदेहानी

वादी के अधिवक्ता के अनुसार प्रथम अपील में भी सरकार को राहत नहीं मिलने के बाद न्यायालय की ओर से दखलदेहानी का आदेश दिया गया. इसी आदेश के अनुपालन में प्रशासनिक टीम ने रविवार को सिविल सर्जन कंपाउंड में कार्रवाई की.

सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी रही कार्रवाई

दखलदेहानी की कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई पूरी की. अब परिसर से मलबा हटाने का काम भी जारी है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By ऋषव मिश्रा कृष्णा

ऋषव मिश्रा कृष्णा प्रिंट माध्यम में पिछले 22 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. फिल्म, शिक्षा और गीत लेखन में रुचि रखते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >