-भागलपुर सिटी में 5068 पोल में नहीं लग सकी है स्ट्रीट लाइट, डेढ़ वर्षों से चल रहा टालमटोल
ब्रजेश, भागलपुरबुनियादी सेवाओं के लिए निगम में टेंडर का खेल इस कदर हावी है कि शहर में रोशनी का प्रबंध तक नहीं हो पायी है. इस खेल के बीच नगर विकास और आवास विभाग (यूडीएचडी) ने निगम को 23 करोड़ 32 लाख 97 हजार 34 रुपये का फंड जारी किया है. यह टायड ग्रांट की राशि है, जिसे बुनियादी सुविधाओं पर ही खर्च किया जा सकता है. बुनियादी सेवाओं में अभी सबसे ज्यादा जरूरी रोशनी का प्रबंधन करना है. वैसे शहर में 5068 बिजली के पोल है, जहां स्ट्रीट लाइट का लगना जरूरी है लेकिन, यह टेंडर के खेल में अटका हुआ है.
बैठकें जारी, निर्णय अधर में, त्योहार भी गुजर गये अंधेरे में
नगर सरकार के गठन के बाद से अब तक स्थायी समिति से लेकर सामान्य बोर्ड तक सभी बैठकों में स्ट्रीट लाइट का मुद्दा प्रमुखता से उठा है. हर बैठक में टेंडर कर एजेंसी बहाल करने का निर्देश दिया गया, लेकिन इसके बावजूद वास्तविक प्रगति नहीं दिखी. दुर्गापूजा और दिवाली जैसे बड़े अवसर गुजर गये, फिर भी शहर में नयी लाइटें नहीं दिखी. बीच में यूडीएचडी ने नयी लाइट खरीद पर रोक लगायी थी, जो अब हट चुकी है. रोक हटने के छह-सात महीने बीतने के बाद भी खरीद और इंस्टॉलेशन की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. अब टायड ग्रांट मद के फंड से तभी लोगों को राहत मिलेगी, जब लाइट एजेंसी बहाल होगी और लाइट्स लगेगा.दिसंबर में खत्म होगा एजेंसी का करार, स्ट्रीट लाइट मेंटनेंस पर मंडराया संकट
नगर निगम जिस एजेंसी के माध्यम से शहर में पहले से लगी स्ट्रीट लाइटों का मेंटनेंस करा रहा है, उसका करार दिसंबर में समाप्त होने जा रहा है. करार समाप्त होते ही शहर की रोशनी व्यवस्था पर नयी मुसीबत खड़ी हो सकती है, क्योंकि अभी जो भी छोटी-मोटी मेंटनेंस हो पा रही है, वह इसी एजेंसी के माध्यम से हो रही है. इसके अलावा एजेंसी का करीब आठ करोड़ रुपये का बकाया भी निगम पर है. जिससे काम की रफ्तार और धीमी होने की आशंका है.कहां कितनी लगेगी एलइडी लाइट्स और कितना आयेगा खर्च
वार्ड 1 से 10 :लाइट्स : 836
राशि: 84,90,700 रुपयेवार्ड 11-20 :
लाइट्स : 789राशि: 80,62,360 रुपये
वार्ड 21-30 :लाइट्स : 1086
राशि: 1,14,37, 590 रुपयेवार्ड 31-39 :
लाइट्स : 983राशि: 1,02,30,270 रुपये
वार्ड 40-51:लाइट्स : 1374
राशि: 1,39,44,630 रुपयेबॉक्स मैटर
वार्डों में लगेंगे 5068 स्ट्रीट लाइटकोट
आचार संहिता लागू होने की वजह से टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी. अब नये सिरे टेंडर जारी कर नयी स्ट्रीट लाइट्स लगायी जायेगी. फिलहाल, मेंटेनेंस का कार्य पूर्व की एजेंसी द्वारा कराया जा रहा है. हालांकि, दिसंबर में उनका करार खत्म हो रहा है. अगर आवेदन करेगा, तो बोर्ड में स्वीकृति मिलने के बाद मेंटेनेंस के लिए टाइम एक्सटेंशन मिल सकता है.जय प्रकाश यादव, रोशनी शाखा प्रभारीनगर निगम, भागलपुर
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