20 सितंबर तक छाए रहेंगे बादल, हल्की से मध्यम बारिश के आसार : किसानों के लिए जारी हुई कृषि सलाह

दक्षिण बिहार के जिलों में 16 से 20 सितंबर तक घने बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. मौसम विभाग ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है, जिसमें खरीफ फसलों की देखभाल, कीट नियंत्रण और सब्जियों की खेती के बारे में जानकारी दी गई है.

भागलपुर : भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 16 से 20 सितंबर तक दक्षिण बिहार के जिलों में आसमान में घने बादल छाए रहने की संभावना है. इस दौरान एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है और हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है. वहीं औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना जतायी गयी है.

पूर्वानुमान अवधि में अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है. सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 85 प्रतिशत और दोपहर में 60 से 70 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इस दौरान 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुरबा हवा चल सकती है.

किसानों के लिए समसामयिक सलाह

खरीफ फसल: कम बारिश की स्थिति में खेतों में खरपतवार बढ़ने की संभावना रहती है. किसानों को समय पर निराई-गुड़ाई करने की सलाह दी गयी है. इसके बाद 20 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेशन करें. खेत में हल्की नमी रहने पर बिस्पायरिबेक सोडियम 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर एवं पायरेजोसल्फ्यूरॉन 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर के मिश्रण का छिड़काव किया जा सकता है. इसके बाद नाइट्रोजन का उपरिवेशन करने की सलाह दी गयी है.

मक्का में तना छेदक की निगरानी करें

मक्का की फसल में तना छेदक के प्रकोप की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गयी है. प्रभावित पौधों की मध्य कलिका सूखकर मुरझा जाती है और खींचने पर आसानी से निकल आती है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित कीटनाशक के प्रयोग के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेने को कहा गया है.

अरहर में गैप फिलिंग और निराई-गुड़ाई जरूरी

अरहर की फसल में आवश्यकता के अनुसार गैप फिलिंग, छंटाई और निराई-गुड़ाई करते रहने की सलाह दी गयी है. सितंबर में बोयी जाने वाली अरहर के लिए खेत की तैयारी भी शुरू करने को कहा गया है.

सब्जियों में जलजमाव से बचाव पर जोर

फूलगोभी की मध्य अवधि वाली किस्मों की बुआई के लिए मौसम अनुकूल बताया गया है. कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी की नियमित निगरानी करने और नियंत्रण के लिए मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप का प्रयोग करने की सलाह दी गयी है. जलजमाव से बचाव के लिए लताओं को बांस की मचान (ट्रेलिस) पर चढ़ाकर जमीन से ऊपर रखने को कहा गया है.

मिर्च की बुआई उठी हुई क्यारियों पर करने की सलाह दी गयी है. बुआई से पहले बीजों का उपचार करने और रोपाई उचित दूरी पर करने को कहा गया है.

पपीते की बुआई के लिए अनुकूल मौसम

बागवानी फसलों में पपीते की बीज बुआई के लिए मौसम को अनुकूल बताया गया है. किसानों को अनुशंसित किस्मों का चयन करने और बुआई से पहले बीजों को उपचारित करने की सलाह दी गयी है. पौधों की उचित ऊंचाई होने पर उन्हें खेत में रोपने की तैयारी करने को कहा गया है.

पशुओं के टीकाकरण पर दें ध्यान

पशुपालकों को पशुओं में पीपीआर, एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) और एचएस (गलघोंटू) जैसे रोगों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी गयी है. पशुओं को स्वच्छ और सूखे स्थान पर रखें तथा बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें. बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने और पशुओं की अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण रखने को कहा गया है.

लम्पी रोग से बचाव के लिए पशुओं के बाड़े को साफ और सूखा रखने तथा नियमित सफाई के बाद चूने के पाउडर का छिड़काव करने की सलाह दी गयी है. साथ ही पशुओं को संतुलित और पौष्टिक आहार देने पर जोर दिया गया है.

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लेखक के बारे में

By ललित किशोर मिश्र

ललित किशोर मिश्र प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से व डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, रेलवे और परिहवन में रुचि रखते हैं.

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