भागलपुर से ब्रजेश नंदन माधुर्य की रिपोर्ट
Buxar-Bhagalpur Expressway: बक्सर से भागलपुर तक सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण होने वाला है. इसके लिए अभी तक केंद्र सरकार के पथ परिवहन, एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तरफ से मौजूदा एनएच को डेवलप कर हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की योजना थी. लेकिन अब इसमें नया अपडेट आ गया है.
क्या है नया अपडेट?
जानकारी के मुताबिक, इस एक्सप्रेसवे का निर्माण केंद्र सरकार की बजाय बिहार सरकार खुद ही अपने दम पर करेगी. इसके साथ ही संभावना है कि एक्सप्रेसवे के रूट में बदलाव हो. बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत आने वाली एजेंसी बीएसआरडीसीएल ने तैयारी शुरू कर दी है.
कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू
निगम ने परियोजना की कार्य योजना तैयार कर ली है और अब डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने के लिए कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. चयनित कंसल्टेंट एजेंसी को हर हाल में 6 महीने के अंदर डीपीआर बनाकर बीएसआरडीसीएल को सौंपना अनिवार्य किया गया है. एजेंसी के लिए पूरा असाइनमेंट एक साल का निर्धारित कि गया है.
ट्रांजक्शन एडवाइजर की भी करेगी नियुक्ति
बीएसआरडीसीएल की ओर से डीपीआर तैयार कराने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी बहाल कर ही रही है. इसके साथ ही वह लेनदेन सलाहकार(टीए) भी चयनित करेगी. यानी, परियोजना के वित्तीय, तकनीकी और संविदा संबंधी कार्यों के लिए ट्रांजक्शन एडवाइजर (लेनदेन सलाहकार) की भी नियुक्ति होगी. इससे परियोजना को तय समय पर आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
350 किलोमीटर लंबा होगा हाई-स्पीड कॉरिडोर
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 350 किलोमीटर होगी. यह बक्सर से शुरू होकर आरा, पटना, मोकामा और मुंगेर होते हुए भागलपुर तक पहुंचेगा. परियोजना के तहत एनएच-922, एनएच-31 और एनएच-33 के हिस्सों का चौड़ीकरण कर उन्हें चार से छह लेन का बनाया जायेगा. एक्सेस-कंट्रोल्ड होने के कारण इस मार्ग पर गाड़ियों की आवाजाही अधिक सुरक्षित और तेज होगी.
यात्रा का समय आधा होने की उम्मीद
एक्सप्रेसवे बनने के बाद बक्सर से भागलपुर तक की यात्रा वर्तमान लगभग 9 घंटे के बजाय करीब चार घंटे में पूरी की जा सकेगी. इससे पश्चिम और पूर्व बिहार के बीच आवागमन आसान होगा और आर्थिक गतिविधियों को भी नयी गति मिलेगी.
एक्सप्रेसवे बनने से बिहार को मिलेंगे कई फायदे
एक्सप्रेसवे बनने से यात्रा तेज होगी. साथ ही कम दूरी और बेहतर सड़क के कारण गाड़ियों के ईंधन खपत भी घटेगी, जिससे आम लोगों और परिवहन कंपनियों दोनों को लाभ मिलेगा. बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को तेज सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा. उद्योगों, कृषि उत्पादों और अन्य सामानों की ढुलाई पहले की तुलना में कम समय में हो सकेगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
मुंगेर और भागलपुर जैसे शहरों का बढ़ेगा महत्व
कॉरिडोर बनने से मुंगेर, भागलपुर, मोकामा, पटना और आरा जैसे शहरों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी. इससे नये निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और इन शहरों का आर्थिक महत्व भी बढ़ेगा. बेहतर सड़क संपर्क मिलने से विक्रमशिला, सुल्तानगंज, मुंगेर और पटना सहित विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच आसान होगी. इससे पर्यटन क्षेत्र को भी नया बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
5 अगस्त को खुलेगी निविदा की तकनीकी बिड
बीएसआरडीसीएल की ओर से जारी निविदा के तहत निविदा कागजात डाउनलोड करने का डेट 16 जुलाई से 5 अगस्त तक रखा गया है. प्री-प्रपोजल मीटिंग 27 जुलाई को होगी. निविदा भरने की अंतिम तारीख 27 जुलाई निर्धारित की गयी है.
निविदा का तकनीकी बिड 5 अगस्त को खोली जायेगी. इसमें मूल्यांकन के बाद सफल एजेंसियों को लेकर वित्तीय बिड खोली जायेगी. जिस एजेंसी का बिड रेट कम होगा उनका चयन किया जायेगा और डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी सौंप दी जायेगी. यानी, अगस्त से डीपीआर बनना शुरू हो जायेगा.
