भागलपुर में मॉनसून की दस्तक से बदला मौसम: रिमझिम बारिश और ठंडी हवाओं से उमस गायब

Bhagalpur Weather: भागलपुर में मॉनसून के सक्रिय होने से मौसम सुहाना हो गया है. तापमान में भारी गिरावट आई है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है. देरी से आए मॉनसून के बावजूद, किसानों में खुशी की लहर है क्योंकि वे अब धान की रोपाई का काम युद्धस्तर पर शुरू कर रहे हैं.

Bhagalpur Weather: जिले में मॉनसून के पूरी तरह सक्रिय होने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को अब रात में एसी (AC) बंद कर पंखे के सहारे सोने पर मजबूर होना पड़ रहा है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों तक क्षेत्र में लगातार रुक-रुक कर बारिश होने और कुछ स्थानों पर मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है.

एक महीने की उमस से मिली राहत, मौसम हुआ सुहाना

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पिछले दो दिनों से हो रही ठंडी हवाओं और मानसूनी बौछारों ने पूरे वातावरण को शीतल कर दिया है. पिछले एक महीने से रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और उमस से बेहाल लोगों को इस बदले मौसम से बड़ी राहत मिली है. स्थिति यह है कि जो लोग दिन-रात एसी चलाने को मजबूर थे, वे अब केवल पंखे की हवा में राहत महसूस कर रहे हैं. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सुहाना मौसम अगले कुछ दिनों तक इसी तरह बना रहेगा और बीच-बीच में तेज बारिश की भी पूरी संभावना है.

देरी से आए मॉनसून के बाद खेतों की ओर मुड़े किसान

मौसम में आए इस सकारात्मक बदलाव और पर्याप्त बारिश से सबसे ज्यादा उत्साह ग्रामीण इलाकों के अन्नदाताओं में देखा जा रहा है. इस साल मॉनसून के काफी देरी से आने के कारण जिले के अधिकांश किसान समय पर धान का बीज (बिचड़ा) तक नहीं गिरा पाए थे और सूखे की चिंता सताने लगी थी. लेकिन अब, पर्याप्त नमी मिलते ही किसानों ने खेतों का रुख कर लिया है और युद्धस्तर पर कृषि कार्य शुरू कर दिए हैं.

कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों पर जोर

कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों से मिली जानकारी के अनुसार, मॉनसून में देरी को देखते हुए इस बार किसान बेहद सूझबूझ से काम ले रहे हैं:

  • कम अवधि वाली फसलें: ज्यादातर किसान अपने खेतों में कम दिनों (कम अवधि) में तैयार होने वाली धान की उन्नत किस्मों के बीज गिरा रहे हैं, ताकि सीजन के अंत तक फसल समय पर काटी जा सके.
  • बिचड़ा रोपाई शुरू: जिन किसानों ने पहले ही निजी संसाधनों से धान का बिचड़ा तैयार कर लिया था, वे अब मानसूनी पानी की उपलब्धता के बाद खेतों में तेजी से धान की रोपनी (रोपाई) में जुट गए हैं.
  • जल संचयन: जिन खेतों में बारिश का पानी कम था, किसान सिंचाई और बारिश के पानी को सहेजकर उसमें पानी का स्तर बढ़ा रहे हैं ताकि रोपाई सुगमता से हो सके.

सबौर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जलजमाव का सही प्रबंधन करें और इस अनुकूल मौसम का लाभ उठाकर धान की बुआई का कार्य जल्द से जल्द निपटा लें.


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लेखक के बारे में

By Lalit kishore mishra

ललित किशोर मिश्र प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से व डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, रेलवे और परिहवन में रुचि रखते हैं.

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