Bhagalpur News: भागलपुर शहर के नौ महत्वपूर्ण विकास कार्य पिछले करीब छह महीने से ठप पड़े हैं. इनमें सड़क और नाला निर्माण से जुड़ी कई योजनाएं शामिल हैं, जिनका सीधा असर बाजार क्षेत्र और घनी आबादी वाले इलाकों के लोगों पर पड़ रहा है. बरसात के बीच जल निकासी और आवागमन की समस्या बढ़ने लगी है. अब नगर निगम ने इन योजनाओं को दोबारा पटरी पर लाने के लिए एजेंसी बहाली की प्रक्रिया तेज कर दी है. सबसे अधिक चर्चा लोहापट्टी मोड़ से डिक्सन मोड़ तक आरसीसी नाला निर्माण और सड़क से जुड़ी योजना को लेकर है, क्योंकि यह मार्ग शहर के सबसे व्यस्त बाजार क्षेत्रों में शामिल है.
क्यों अटके हैं भागलपुर के 9 विकास कार्य
नगर निगम की जिन नौ योजनाओं पर काम रुक गया है, उनमें सड़क और नाला निर्माण की परियोजनाएं प्रमुख हैं. कई योजनाओं के लिए पहले एजेंसी का चयन नहीं हो पाया, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका.
अब निगम ने नई निविदा प्रक्रिया के जरिए एजेंसियों का चयन करने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि लंबे समय से लंबित योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके.
लोहापट्टी मोड़ से डिक्सन मोड़ तक नाला निर्माण क्यों जरूरी
लोहापट्टी मोड़ से डिक्सन मोड़ तक का इलाका भागलपुर के सबसे व्यस्त बाजार क्षेत्रों में गिना जाता है.
यह सड़क पहले एनएच-80 का हिस्सा थी. लोहिया पुल बनने के बाद इसका एक हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग से अलग हो गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद इस हिस्से में सड़क और नाला निर्माण से जुड़े आवश्यक कार्य लंबे समय से लंबित हैं.
कूड़े से दबा नाला, जल निकासी बनी बड़ी समस्या
बाजार क्षेत्र होने के कारण इस मार्ग पर देर रात तक लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है.
सड़क किनारे जमा कूड़े के कारण पुराना नाला कई स्थानों पर दब चुका है. बरसात के दौरान पानी निकासी बाधित होने से सड़क पर जलजमाव और आवागमन की समस्या बढ़ जाती है. इसी वजह से आरसीसी नाला निर्माण को स्थानीय लोग सबसे जरूरी परियोजनाओं में मान रहे हैं.
दवाई पट्टी में पुलिया निर्माण भी लंबित
नगर निगम की लंबित योजनाओं में दवाई पट्टी क्षेत्र में पुलिया निर्माण का कार्य भी शामिल है.
स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि पुलिया निर्माण पूरा होने से जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी और बरसात के समय होने वाली परेशानी में कमी आएगी.
4.47 करोड़ रुपये की हैं ये योजनाएं
नगर निगम के अनुसार इन सभी नौ विकास कार्यों की अनुमानित लागत करीब 4 करोड़ 47 लाख 1 हजार 996 रुपये है.
निगम का दावा है कि यदि एजेंसी का चयन समय पर हो जाता है, तो सभी योजनाओं का निर्माण कार्य करीब चार महीने के भीतर पूरा कराया जा सकता है.
1 सितंबर को खुलेगा तकनीकी बिड
एजेंसी बहाली के लिए जारी निविदा का तकनीकी बिड 1 सितंबर को खोला जाएगा.
तकनीकी बिड में सफल एजेंसियों को वित्तीय बिड प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा. इसके बाद सबसे उपयुक्त एजेंसी का चयन कर कार्यादेश जारी किया जाएगा.
एजेंसी चयन के बाद शुरू होगा निर्माण
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी लंबित विकास कार्यों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
यदि प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो शहर के बाजार क्षेत्र, सड़क और नाला व्यवस्था से जुड़ी कई पुरानी समस्याओं के समाधान की उम्मीद बढ़ सकती है.
