Bhagalpur News: तीन दिनों तक माता विषहरी की भक्ति में डूबा भागलपुर बुधवार को भावुक विदाई का गवाह बना. सुबह से मंदिरों और पूजा स्थलों पर पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा. श्रद्धालुओं ने माता विषहरी से परिवार की सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली की कामना की. शाम होते-होते वही शहर विसर्जन शोभायात्राओं से गुलजार हो उठा. अलग-अलग इलाकों से माता की प्रतिमाएं निकलीं और देर रात तक विसर्जन का सिलसिला चलता रहा.
शहर के करीब 116 पूजा स्थलों पर स्थापित माता विषहरी की प्रतिमाओं को अलग-अलग घाटों तक शोभायात्रा के साथ ले जाया गया. चंपानगर पुल घाट पर दोपहर बाद विसर्जन शुरू हुआ, जबकि मुसहरी घाट स्थित कृत्रिम तालाब में देर रात तक प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम जारी रहा. इससे पहले दोपहर 3.15 बजे रेलवे स्टेशन चौक से केंद्रीय समिति के नेतृत्व में मुख्य विसर्जन शोभायात्रा निकली.
विदाई से पहले महिलाओं ने निभायी खास परंपरा
प्रतिमाओं को पूजा स्थलों से बाहर निकालने से पहले महिलाओं ने माता विषहरी को खोइछा दिया. यह केवल पूजा की रस्म नहीं थी, बल्कि माता से परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना के साथ विदाई देने की भावनात्मक परंपरा भी रही. पूजा स्थलों पर इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही.
चंपानगर स्थित प्राचीन मुख्य विषहरी मंदिर की प्रतिमा के विसर्जन के बाद मंदिर परिसर में शांति पूजन का आयोजन किया गया. पंडित संतोष झा ने वैदिक विधि-विधान से मां मनसा विषहरी की शांति पूजा संपन्न करायी.
स्टेशन चौक पर सबसे पहले पहुंची परबत्ती की प्रतिमा
विसर्जन शोभायात्रा का प्रमुख केंद्र रेलवे स्टेशन चौक रहा. सबसे पहले परबत्ती की प्रतिमा दोपहर 3.15 बजे यहां पहुंची. करीब 20 मिनट बाद वारसलीगंज की प्रतिमा भी स्टेशन चौक पहुंची. केंद्रीय समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने दोनों प्रतिमाओं की विधिवत आरती की. इसके बाद प्रतिमाओं को क्रम से घाटों की ओर रवाना किया गया.
केंद्रीय पूजा समिति के अध्यक्ष भोला कुमार मंडल, संरक्षक पूर्व मेयर डॉ. वीणा यादव, प्रकाशचंद्र गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप कुमार, महासचिव शशि शंकर राय सहित समिति के अन्य सदस्यों ने अलग-अलग पूजा स्थलों का भ्रमण किया. उन्होंने प्रतिमाओं को व्यवस्थित तरीके से कतारबद्ध कराने में सहयोग किया.
भाला और लाठी के करतब ने खींचा लोगों का ध्यान
शोभायात्रा शुरू होने से पहले स्टेशन चौक पर युवाओं ने भाला और लाठी सहित पारंपरिक हथियारों से करतब दिखाये. शोभायात्रा आगे बढ़ने के साथ रास्ते में भी अलग-अलग जगहों पर करतब का प्रदर्शन जारी रहा.
इन प्रस्तुतियों ने परंपरा और उत्सव के रंग को और गहरा किया. परिवार के साथ विसर्जन देखने पहुंचे लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं में इसे लेकर उत्साह दिखा.
कहीं कृत्रिम तालाब तो कहीं घाट, अलग-अलग जगहों पर हुआ विसर्जन
विषहरी पूजा की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में व्यवस्था की गयी थी. चंपानगर और नाथनगर क्षेत्र की 11 प्रतिमाओं का विसर्जन दोपहर एक बजे से शुरू हुआ और देर शाम तक चलता रहा.
रिफ्यूजी कॉलेज में स्थापित 20 प्रतिमाओं का विसर्जन पास के टैंक घाट स्थित अस्थायी तालाब में किया गया. वहीं मुख्य शहर के गौशाला, नया बाजार, आरके लेन, काजीवलीचक, इशाकचक, ईश्वरनगर, गुदड़गंज, साहेबगंज, अंबाबाग, भीखनपुर, बड़ी खंजरपुर, छोटी खंजरपुर, तिलकामांझी, वारसलीगंज, गोलाघाट, उर्दू बाजार, आनंद चिकित्सालय रोड, कुतुबगंज, इशाकचक पासीटोला और रामसर समेत विभिन्न क्षेत्रों की 32 प्रतिमाओं का विसर्जन मायागंज अस्पताल के पीछे बने कृत्रिम तालाब में किया गया.
शोभायात्रा के साथ चलता रहा मेला
प्रतिमाओं की शोभायात्रा स्टेशन चौक से खलीफाबाग चौक, कोतवाली चौक, नया बाजार चौक, आदमपुर चौक, छोटी खंजरपुर और बड़ी खंजरपुर होते हुए घाटों तक पहुंची.
विसर्जन मार्ग पर जगह-जगह मेला भी लगा था. खिलौनों की दुकानों से लेकर खाने-पीने के स्टॉल तक लोगों की भीड़ रही. बच्चों ने खिलौनों का आनंद लिया, तो परिवारों ने मेले में खान-पान का लुत्फ उठाया. मुसहरी घाट पर देर रात तक मेला लगा रहा. दुकानदारों ने भी ग्राहकों की पसंद के अनुसार अलग-अलग व्यंजन उपलब्ध कराये.
इस तरह विषहरी पूजा सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्थानीय बाजार और छोटे दुकानदारों के लिए भी यह दिन खास रहा.
अंग की लोकसंस्कृति और नारी शक्ति से जुड़ा पर्व
विषहरी पूजा को अंग क्षेत्र की विशिष्ट लोकपरंपरा माना जाता है. विसर्जन शोभायात्रा का शुभारंभ करते हुए पूर्व महापौर डॉ. वीणा यादव ने इसे नारी सशक्तीकरण का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि यह पर्व धीरे-धीरे बिहार से निकलकर देशभर में अपनी पहचान बना रहा है.
प्रकाशचंद्र गुप्ता ने कहा कि अंग की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने में केंद्रीय पूजा समिति लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. वहीं केंद्रीय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष सह प्रवक्ता प्रदीप कुमार ने विषहरी पूजा को राजकीय मेला का दर्जा देने की मांग सरकार से की.
उन्होंने इस अवसर पर राजकीय अवकाश घोषित करने और चंपानगर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग भी उठायी. चंपानगर को सती बिहुला का उद्गम स्थल माना जाता है. ऐसे में इस क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ने की मांग स्थानीय संस्कृति और धार्मिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने से जुड़ी है.
Bhagalpur News: शोभायात्रा में दिखा सामाजिक सद्भाव
विषहरी पूजा के आयोजन में सामाजिक सद्भाव की तस्वीर भी सामने आयी. स्टेशन चौक पर शोभायात्रा के दौरान पूजा आयोजन में सहयोग करने वाले अलग-अलग समुदायों के लोगों को सम्मानित किया गया.
महबूब आलम, मिंटू कलाकार, तकी जावेद और नेजाहत अंसारी समेत अन्य लोगों को सम्मानित किया गया. धार्मिक आयोजन में विभिन्न समुदायों की भागीदारी ने आपसी सहयोग और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया.
परंपरा को मिलेगी नई पहचान?
तीन दिवसीय पूजा और विसर्जन के साथ इस वर्ष का आयोजन संपन्न हो गया. लेकिन आयोजन के दौरान उठी मांगें अब आगे की चर्चा का विषय रहेंगी. विषहरी पूजा को राजकीय मेला का दर्जा देने, राजकीय अवकाश घोषित करने और चंपानगर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण होगा.
वहीं स्थानीय स्तर पर ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान कृत्रिम तालाब, विसर्जन घाट, शोभायात्रा मार्ग और मेले की व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी भी अहम रहती है. इस बार अलग-अलग स्थानों पर विसर्जन की व्यवस्था होने से आयोजन कई क्षेत्रों में बंटा रहा और देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही.
माता विषहरी की विदाई के साथ भले ही शहर की सड़कों पर शोभायात्राओं का शोर थम गया हो, लेकिन अंग की लोकसंस्कृति, बिहुला-विषहरी की परंपरा और इसे व्यापक पहचान दिलाने की मांग अब भी चर्चा में बनी रहेगी.
