भागलपुर में अगले पांच दिनों में बरसेंगे मेघ: कई जगह तेज बारिश के संकेत, उमस से बेहाल लोगों को मिलेगी राहत

Bhagalpur Heavy Rain Alert: भागलपुर में आसमान में मंडरा रहे काले बादलों के बावजूद थमी बारिश से उमस का सितम चरम पर है. इस बीच मौसम विभाग ने 1 से 5 जुलाई तक आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी कर राहत की उम्मीद जगाई है.

भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट

Bhagalpur Heavy Rain Alert: भागलपुर जिले में पिछले 48 घंटों से आसमान में घने काले बादलों का डेरा होने के बावजूद बारिश की एक बूंद नहीं टपकने से आम जनजीवन उमस भरी भीषण गर्मी से त्रस्त है. हवा की रफ्तार पूरी तरह थम जाने के कारण वातावरण में चिपचिपाहट और उमस काफी बढ़ गई है, जिससे अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. हालांकि, इस उमस भरी गर्मी के बीच राहत भरी खबर आई है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संयुक्त बुलेटिन जारी कर अगले पांच दिनों तक जिले में आंधी के साथ झमाझम बारिश होने का पुख्ता पूर्वानुमान जताया है.

1 से 5 जुलाई तक आंधी और वज्रपात का अलर्ट; भागलपुर-बांका में भारी बारिश के आसार

  • बारिश और आंधी की अवधि: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 1 से 5 जुलाई के दौरान संपूर्ण दक्षिण बिहार के कई जिलों में एक-दो स्थानों पर तेज गर्जना और चमक के साथ धूल भरी आंधी चलने तथा हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है.
  • भागलपुर और बांका विशेष बुलेटिन: इस मानसूनी सिस्टम का सबसे ज्यादा असर भागलपुर और पड़ोसी जिले बांका में देखने को मिल सकता है, जहां कुछ पॉकेट्स (इलाकों) में मूसलाधार या तेज बारिश होने का विशेष अनुमान है.
  • तापमान का सूचकांक: इस अवधि में जिले का अधिकतम तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जिससे पारा गिरने से लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी.

Bhagalpur Heavy Rain Alert: मानसून की बेरुखी से किसान परेशान; वैज्ञानिकों ने सुझाया ‘सबौर सोना’ का विकल्प

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल पदाधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. उन्होंने कहा कि मानसून की वर्तमान कमजोर स्थिति को देखते हुए जिन किसानों के पास निजी सिंचाई (पंपसेट/बोरिंग) की मुकम्मल सुविधा उपलब्ध है, वे बेझिझक मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों का बिचड़ा खेतों में डाल दें. इसके अलावा, तैयार बिचड़ों को सूखने से बचाने के लिए आवश्यकतानुसार जीवन रक्षक हल्की सिंचाई जरूर करें. किसान चाहें तो कम पानी में तैयार होने वाली ‘सबौर मोती धान’ और ‘सबौर सोना’ जैसी उन्नत किस्मों की सीधी बुआई (DSR विधि) भी कर सकते हैं.

मौसम विभाग की इस नई चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने भी आपदा प्रबंधन विंग को अलर्ट कर दिया है, क्योंकि आंधी और बारिश के दौरान वज्रपात (ठनका) की घटनाएं बढ़ जाती हैं. लोगों से अपील की गई है कि वे बादलों की गड़गड़ाहट के समय खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचें.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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