Ganga Kosi River Water Level: भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. हालांकि वर्तमान में सभी सुरक्षात्मक तटबंध सुरक्षित हैं, लेकिन कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने तटबंध विहीन इलाकों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है.
इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर राज्य मुख्यालय की विशेष नजर
इस्माईलपुर-बिंद टोली स्पर और तटबंध क्षेत्र में पिछले 24 घंटे के दौरान गंगा नदी के जलस्तर में 2 सेंटीमीटर की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है. यहाँ गंगा नदी अपने न्यूनतम जलस्तर 24.00 मीटर से 2 मीटर ऊपर यानी 26.00 मीटर पर बह रही है. फिलहाल इस महत्वपूर्ण तटबंध पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी प्रकार का खतरा नहीं है. चूंकि यह तटबंध राज्य स्तर पर बेहद संवेदनशील माना जाता है, इसलिए पटना मुख्यालय स्तर से इसकी चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है. इसी कड़ी में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता लगातार क्षेत्र का हवाई व जमीनी निरीक्षण कर रहे हैं.
मदरौनी में तटबंध न होने से कई गांवों पर बाढ़ का संकट
दूसरी तरफ, रंगरा चौक प्रखंड के मदरौनी में कोसी नदी के जलस्तर में 2 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी देखी गई है. यहाँ नदी का न्यूनतम जलस्तर 24.50 मीटर है, जिससे 2.58 मीटर ऊपर उठकर वर्तमान में कोसी 27.08 मीटर पर प्रवाहित हो रही है. स्थानीय ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि मदरौनी में अब तक सुरक्षात्मक तटबंध का निर्माण नहीं हो सका है. ऐसे में यदि कोसी के जलस्तर में थोड़ी भी और वृद्धि होती है, तो सधुआ, चापर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीणों को भीषण बाढ़ का दंश झेलना पड़ सकता है.
खरीक के चोरहर में स्थिर है कोसी का जलस्तर
खरीक प्रखंड के चोरहर क्षेत्र की बात करें तो यहाँ कोसी नदी का जलस्तर फिलहाल 28.85 मीटर पर स्थिर बना हुआ है. यह स्तर यहाँ के न्यूनतम जलस्तर से 2.85 मीटर अधिक है. नदी के स्थिर रहने से फिलहाल इस इलाके में स्थिति सामान्य है और कटाव जैसी कोई तात्कालिक सूचना नहीं है.
Ganga Kosi River Water Level: फ्लड फाइटिंग की मुकम्मल व्यवस्था, चौकसी बढ़ी
बाढ़ और कटाव की संभावनाओं को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. कार्यपालक अभियंता इंजीनियर गौतम कुमार ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि अनुमंडल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी प्रमुख तटबंधों और स्परों पर विभागीय कनीय अभियंताओं और कर्मियों की चौकसी बढ़ा दी गई है. रात-दिन पेट्रोलिंग की जा रही है. इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति या रिसाव से निपटने के लिए संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में जियो बैग, रैट्स और फ्लड फाइटिंग (बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य) की मुकम्मल व्यवस्था अग्रिम रूप से कर ली गई है.
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