बाढ़ राहत में लापरवाही पर प्रशासन सख्त, वेंडर पर ब्लैकलिस्ट और जेल की तलवार, 5 कर्मियों को भी शो-कॉज

भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों के लिए बने सामुदायिक रसोई केंद्रों में भारी अव्यवस्था सामने आई है. प्रशासन ने वेंडर को ब्लैकलिस्ट करने और जेल भेजने की चेतावनी दी है, वहीं अनुपस्थित पांच कर्मचारियों से भी जवाब मांगा गया है.

Bhagalpur Flood Relief: भागलपुर. बाढ़ के बीच जिन सामुदायिक रसोई केंद्रों में प्रभावित लोगों को राहत और सम्मान के साथ भोजन मिलना चाहिए था, वहां बदइंतजामी और ड्यूटी से गायब रहने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. खरीक अंचल में सामुदायिक रसोई केंद्रों की व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले वेंडर के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है. वहीं, ड्यूटी से अनुपस्थित मिले पांच कर्मचारियों से भी जवाब मांगा गया है.

प्रशासन की कार्रवाई से साफ है कि आपदा राहत के काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जायेगा. वेंडर को जहां तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जेल भेजने तक की चेतावनी दी गयी है, वहीं अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन या मानदेय काटने और अनुशासनिक कार्रवाई की बात कही गयी है.

चार रसोई केंद्रों में मिली भारी अव्यवस्था

अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) ने 24 और 26 अगस्त को खरीक अंचल की राघोपुर पंचायत स्थित चार सामुदायिक रसोई केंद्रों का निरीक्षण किया था. इनमें काली स्थान, दुर्गा स्थान, सामुदायिक भवन वार्ड-06 और राजकीय मध्य विद्यालय शामिल थे.

निरीक्षण के दौरान सामुदायिक रसोई केंद्रों में निर्धारित व्यवस्था और मौके की स्थिति में बड़ा अंतर मिला. नियमों के अनुसार प्रत्येक केंद्र पर 50 टेबल, 250 कुर्सियां, 500 स्टील की थालियां और 500 ग्लास उपलब्ध रहने चाहिए थे. लेकिन मौके पर महज 10 टेबल और 50 कुर्सियां ही मिलीं.

थाली और ग्लास की व्यवस्था नहीं होने के कारण बाढ़ पीड़ितों को एसओपी के विपरीत जमीन पर बैठाकर पत्तल में खाना खिलाया जा रहा था.

भीषण गर्मी में पंखे तक नहीं, भोजन भी देर से पहुंचा

राहत केंद्रों की व्यवस्था को लेकर निरीक्षण में एक और गंभीर कमी सामने आयी. पंडाल को तीनों तरफ से कपड़े से नहीं ढका गया था. भीषण गर्मी के बावजूद वहां सीलिंग फैन या स्टैंड फैन की व्यवस्था नहीं थी.

बाढ़ से प्रभावित लोग पहले से ही मुश्किल हालात से गुजर रहे थे. ऐसे में सामुदायिक रसोई केंद्र में बैठने, खाने और गर्मी से राहत की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है.

इतना ही नहीं, प्रथम पाली में खाद्य सामग्री भी काफी देर से पहुंची. इसका असर सीधे बाढ़ पीड़ितों पर पड़ा और उन्हें सुबह का भोजन दोपहर में मिल सका.

वेंडर को नोटिस, तीन साल तक ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी

व्यवस्था में मिली कमियों के बाद अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) ने जायसवाल ट्रेडर्स, नवगछिया के प्रोपराइटर नितीश कुमार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है.

नोटिस में पूछा गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा-56 के तहत आदेश का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाये. प्रशासन ने एक वर्ष के कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा के प्रावधान का भी उल्लेख किया है.

इसके अलावा निविदा की शर्तों के तहत जमा की गयी 25 हजार रुपये की अग्रिम राशि जब्त करने और फर्म को तीन वर्षों के लिए काली सूची में डालने को लेकर भी जवाब मांगा गया है.

अब वेंडर के स्पष्टीकरण के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई तय करेगा.

रात में जांच के दौरान पांच कर्मचारी मिले गैरहाजिर

सामुदायिक रसोई केंद्रों की निगरानी में केवल वेंडर की ही लापरवाही सामने नहीं आयी. 28 अगस्त की रात अपर समाहर्ता ने खरीक अंचल के राघोपुर स्थित दो सामुदायिक रसोई केंद्रों का औचक निरीक्षण किया.

रात 7:15 बजे राघोपुर वार्ड नंबर छह स्थित सामुदायिक भवन में निरीक्षण के दौरान कृषि समन्वयक अनीष सहाय, सर्वेक्षण अमीन अतुल कुमार और सर्वेक्षण अमीन बाबूलाल गोंड अनुपस्थित मिले.

इसके कुछ मिनट बाद रात 7:20 बजे काली स्थान राघोपुर स्थित सामुदायिक रसोई केंद्र की जांच की गयी. यहां सर्वेक्षण अमीन विष्णु प्रिया और सेविका रूबी कुमारी ड्यूटी से गायब मिलीं.

इन सभी कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति अंचल अधिकारी, खरीक की ओर से सामुदायिक रसोई केंद्रों के सुचारू संचालन के लिए की गयी थी.

बाढ़ पीड़ितों की सेवा में ड्यूटी से गायब रहना पड़ा भारी

आपदा की स्थिति में सामुदायिक रसोई केंद्रों की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है. यहां प्रभावित लोगों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ केंद्र की व्यवस्था और जरूरतों पर नजर रखना भी जरूरी होता है.

ऐसे समय में प्रतिनियुक्त कर्मचारियों का ड्यूटी से अनुपस्थित मिलना प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. अपर समाहर्ता ने इसे घोर लापरवाही और कर्तव्यहीनता माना है.

सभी पांच कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस जारी कर पूछा गया है कि क्यों नहीं उनका एक दिन का वेतन या मानदेय काटा जाये और उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाये.

आपदा प्रबंधन कानून का भी दिया हवाला

प्रशासन ने कर्मचारियों के मामले में भी आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा-56 का उल्लेख किया है. नोटिस में पूछा गया है कि आदेश के उल्लंघन के लिए एक वर्ष के कारावास, जुर्माने या दोनों की कार्रवाई क्यों नहीं की जाये.

इस कार्रवाई के बाद राहत कार्यों में लगे कर्मचारियों और एजेंसियों के बीच स्पष्ट संदेश गया है कि बाढ़ जैसी आपदा के दौरान ड्यूटी में लापरवाही या राहत व्यवस्था में कमी को हल्के में नहीं लिया जायेगा.

Bhagalpur Flood Relief: आगे क्या होगा, जवाब के बाद तय होगी कार्रवाई

फिलहाल वेंडर और पांचों कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. अब उनके जवाब के आधार पर प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा.

वेंडर के मामले में अग्रिम राशि जब्त करने और तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई हो सकती है, जबकि कर्मचारियों के खिलाफ वेतन कटौती और अनुशासनिक कार्रवाई का रास्ता खुला है.

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चल रहे राहत कार्यों में यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामुदायिक रसोई केंद्र संकट के समय प्रभावित परिवारों के लिए भोजन का प्रमुख सहारा होते हैं. प्रशासन की सख्ती से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इन केंद्रों पर व्यवस्था बेहतर होगी और बाढ़ पीड़ितों को समय पर भोजन और जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी.

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By संजीव झा

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