बच्चों में बचपन से ही दें सनातन संस्कृति के संस्कार :अर्चना सिंह

भागलपुर शहर में इन दिनों आध्यात्मिक और धार्मिक बयार बह रही है. शहर के दो अलग-अलग प्रमुख स्थलों— बरारी नील कोठी घाट और भीखनपुर— में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. शुक्रवार की देर शाम दोनों ही पंडालों में विख्यात कथावाचकों ने सनातन संस्कृति, बाल संस्कार और कलियुग के बदलते सामाजिक परिवेश पर मर्मस्पर्शी प्रवचन किया.

बरारी नील कोठी घाट स्थित मां दक्षिणी काली मंदिर परिसर में आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास अर्चना सिंह ठाकुर ने माता-पिता से बच्चों को बचपन से ही धर्म और भक्ति से जोड़ने की अपील की. वहीं दूसरी ओर, भीखनपुर कॉलोनी बुनियादी स्कूल काली स्थान के समीप चल रहे महायज्ञ के पांचवें दिन गोनूधाम के पंकजाचार्य जी महाराज ने कलियुग की प्रासंगिकता और पारिवारिक मूल्यों के ह्रास पर गहरी चिंता व्यक्त की.

"भक्ति बुढ़ापे की जागीर नहीं, बचपन से हो शुरुआत" : अर्चना सिंह ठाकुर

बरारी नील कोठी घाट काली मंदिर परिसर में संगीतमय भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से बोलते हुए विदुषी कथा व्यास अर्चना सिंह ठाकुर ने आधुनिक समाज में बच्चों के लालन-पालन और संस्कारों पर जोर दिया. उन्होंने मुख्य बातें साझा कीं:

  • संस्कारों की महती आवश्यकता: आज के भौतिकवादी परिवेश में बच्चों को सही उम्र में सही संस्कार देना सबसे जरूरी है. यदि बच्चों में बचपन से ही अच्छे और नैतिक संस्कार पनपेंगे, तभी भविष्य में एक श्रेष्ठ और अपराधमुक्त समाज का निर्माण संभव है.
  • धर्म सर्वोपरि है: मनुष्य अपने जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी कामयाबी हासिल कर ले, धन-दौलत कमा ले, लेकिन उसे अपने मूल धर्म और सनातन संस्कृति को हमेशा सर्वोपरि रखना चाहिए. भक्ति और भजन केवल बुढ़ापे के लिए नहीं हैं, बल्कि यह जीवन की शुरुआत से ही आचरण का हिस्सा होना चाहिए.

इस अवसर पर मुख्य यजमान गोपाल यादव, राकेश यादव और राजा राम सिंह सहित सैकड़ों महिला व पुरुष श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा रसपान कर रहे थे.

"वृद्धाश्रमों का बढ़ना कलियुग की भविष्यवाणी का सच होना है" : पंकजाचार्य महाराज

भीखनपुर कॉलोनी बुनियादी स्कूल काली स्थान के समीप आयोजित भागवत कथा के पांचवें दिन गोनूधाम के प्रख्यात कथावाचक पंकजाचार्य जी महाराज ने समाज की वर्तमान कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया:

  • भविष्यवाणी हो रही सत्य: शास्त्रों में कलियुग को लेकर जो भविष्यवाणियां हजारों वर्ष पहले की गई थीं, वे आज अक्षरशः सच साबित हो रही हैं.
  • पारिवारिक मूल्यों का ह्रास: आज संतानें अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करने के बजाय उन्हें वृद्धाश्रम (Old Age Homes) में छोड़ रही हैं, जबकि खुद आलीशान बंगलों में ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जी रहे हैं. यह सामाजिक और नैतिक पतन का सबसे बड़ा उदाहरण है.

शनिवार को मनेगा भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का विवाहोत्सव

भीखनपुर कथा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि शनिवार की देर शाम कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के भव्य विवाहोत्सव (झांकी) का आयोजन बेहद धूमधाम से किया जाएगा. इस विशेष प्रसंग को लेकर पूरे भीखनपुर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है. पंडाल को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है और छप्पन भोग के साथ विशेष महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है.


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Author: Deepak kumar rao

Published by: Divyanshu Prashant

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