बबरगंज थाना, थानाध्यक्षों के लिए क्यों बन रहा है ‘मुश्किल पोस्टिंग’?
भागलपुर जिला के बबरगंज थाना पिछले कुछ वर्षों से लगातार चर्चा में रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि यहां तैनात कई थानाध्यक्ष अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके
भागलपुर जिला के बबरगंज थाना पिछले कुछ वर्षों से लगातार चर्चा में रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि यहां तैनात कई थानाध्यक्ष अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. किसी को लापरवाही के आरोप में निलंबित होना पड़ा, तो किसी को लाइन हाजिर कर दिया गया. हालिया वायरल वीडियो प्रकरण में भी तत्कालीन थानाध्यक्ष दिव्या कुमारी को निलंबित किया गया है. इससे पहले वर्ष 2022 में तत्कालीन थानाध्यक्ष विश्वबंधु कुमार को एक बाइक लूट मामले में केस दर्ज नहीं करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद नए थाना प्रभारी की नियुक्ति करनी पड़ी. स्थानीय लोगों और पुलिस महकमे में यह चर्चा आम है कि बबरगंज थाना क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है. नशीले पदार्थों के कारोबार, आपराधिक गतिविधियां और लगातार पुलिस कार्रवाई के कारण यहां के थानाध्यक्षों पर अतिरिक्त दबाव रहता है. छोटी चूक भी बड़े प्रशासनिक एक्शन का कारण बन जाती है. हाल के वर्षों में बार-बार हुए निलंबन और तबादलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बबरगंज थाना में ऐसा क्या है कि अधिकांश थानाध्यक्ष अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा नहीं कर पाते. पिछले दस सालों में कई थानाध्यक्षों ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया. किसी पर साल भर में तो किसी पर दो-चार माह में ही कार्रवाई हो गयी.केसविश्वबंधु कुमार :- इन्हें वर्ष 2022 में एक बाइक लूट मामले में केस दर्ज नहीं करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था. यह मात्र पांच माह भी सेवा दे सके थे. इन्होंने तीन फरवरी 2022 को योगदान दिया था और तीन जुलाई 2022 को निलंबित हो गये थे.सिकंदर कुमार :- एक मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में इन्हें महज ढाई माह में (3 जुलाई 2022 से 20 सितंबर 22) ही कार्रवाई कर हटा दिया गया था.इसके अलावा तत्कालीन थानाध्यक्ष मिथलेश कुमार 2019 में महज सात माह, प्रमोद साह 2023 में सात माह, उत्तम कुमार 2017 में तीन माह, 2017 में ही राजेश कुमार महज दो माह व निर्मल कुमार पर महज एक साल भी नहीं रह सके थे.
क्या बबरगंज पनिशमेंट पोस्टिंग तो नहीं
बबरगंज थाना में पोस्टिंग थानाध्यक्षों के लिए पनिशमेंट पोस्टिंग तो नहीं किया जा रहा है. हाल के वर्षों में बार-बार हुए निलंबन और तबादलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बबरगंज थाना में ऐसा क्या है कि अधिकांश थानाध्यक्ष अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा नहीं कर पाते. पुलिस विभाग की सख्त जवाबदेही व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्र की चुनौतियां इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं.
आखिर सभी दोषी बबरगंज में ही क्यों
अब सवाल यह उठता है कि आखिर बबरगंज थाना के प्रभारियों पर ही सबसे अधिक कार्रवाई क्यों होती है. अगर बबरगंज जाने वाले दोषी हैं, तो वह पहले जहां थे, वहां भी इनकी जांच क्यों नहीं की गयी. वहीं दूसरा सवाल, अगर पहले जब वह सही थे, तो फिर दो-चार माह में ही हटाने नौबत क्यों आ गयी.
थाना क्षेत्र के सुरक्षा के साथ खिलवाड़
अगर स्थिति ऐसी रही तो थाना क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो सकेगी. क्योंकि किसी भी थाना प्रभारी को क्षेत्र व लोगों को समझने में दो-चार माह समय लगता है. जबतक वह कुछ समझ पाते हैं, तबतक उनको हटा दिया जाता है.
कार्य में नहीं बरती जायेगी लापरवाही
सिटी एसपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि लोगों के साथ बेहतर रिलेशन व सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. इसे लेकर नये थानाध्यक्षों को प्रशिक्षण देने के साथ ब्रिफ भी किया जा रहा है.
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