इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान के तहत देवाधिदेव महादेव का पवित्र गंगाजल, सुगंधित पुष्पों, ताजे फलों और पंचामृत से भव्य महाअभिषेक किया गया. सरकारी पूजा और महाआरती के संपन्न होते ही जैसे ही मंदिर के कपाट (पट) आम भक्तों के लिए खोले गए, बाबा के दर्शन की आस में भोर से ही कतारों में खड़े श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा.
वैदिक मंत्रोच्चार और महंत के सान्निध्य में अनुष्ठान
बाबा बूढ़ानाथ मंदिर में शुक्रवार को आयोजित यह विशेष सरकारी पूजा मुख्य महंत शिवनारायण गिरि के कुशल सान्निध्य में आयोजित हुई. इस धार्मिक विधि को विद्वान पुरोहित पंडित अभिषेक पांडेय ने पूर्ण शुद्धता, निष्ठा और सनातनी नियमों के साथ संपन्न कराया. अनुष्ठान के दौरान गर्भगृह से उठती वैदिक मंत्रों की गूंज से संपूर्ण मंदिर प्रांगण में अलौकिक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया.
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम
ओपीडी और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की तरह ही मंदिर परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास तैयारी की गई थी. पूरी पूजा व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने और अनुष्ठान की गरिमा बनाए रखने में मंदिर के प्रबंधक बाल्मिकी सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगमता से दर्शन सुनिश्चित करने के लिए बैरिकेडिंग और कतार प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए थे, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को जलार्पण करने में कोई असुविधा न हो.
'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजा परिसर
जैसे ही सुबह की मुख्य आरती समाप्त हुई और आम भक्तों के लिए पट खुले, पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बाबा बूढ़ानाथ की जय' के गूंजते जयकारों से सराबोर हो गया. भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर मत्था टेका. निरंतर हो रहे भजन-कीर्तन और पूजन-अर्चना से मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और दिव्य नजर आया. भक्तों ने कतारबद्ध होकर शांतिपूर्ण तरीके से बाबा का आशीर्वाद लिया और अपने परिवार की सुख, शांति व समृद्धि की मंगलकामना की.
