तस्वीरों, मंजूषा और लोकनाट्य में दिखी अंग की विरासत, भागलपुर में बिहुला-विषहरी उत्सव का समापन

भागलपुर में बिहुला-विषहरी उत्सव का समापन हो गया, जिसमें अंग क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को मंच दिया गया. उत्सव में मंजूषा चित्रकला, लोकनाट्य, फोटोग्राफी प्रदर्शनी और लोकनृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया.

Bhagalpur News: बिहुला-विषहरी की लोकगाथा सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का जीवंत हिस्सा है. इसी लोकपरंपरा, कला और विरासत को मंच देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय बिहुला-विषहरी उत्सव का बुधवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में समापन हो गया. अंतिम दिन लोककला, फोटोग्राफी, चित्रकला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को अंग की समृद्ध परंपराओं से रूबरू कराया.

कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार और जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव में कलाकारों और कला प्रेमियों की सक्रिय भागीदारी रही. कार्यक्रम में मंजूषा चित्रकला से लेकर लोकनृत्य और लोकनाट्य तक ने बिहुला-विषहरी की लोकगाथा को अलग-अलग कला माध्यमों के जरिये जीवंत किया.

तस्वीरों में दिखी जिंदगी की अलग-अलग कहानियां

भागलपुर संग्रहालय में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन द्वारा संयोजित एकल फोटोग्राफी प्रदर्शनी ‘दृष्टिकोण’ लोगों के आकर्षण का केंद्र रही. प्रदर्शनी में उनके द्वारा खींची गयी तस्वीरों के जरिये मानव जीवन के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखा गया.

तस्वीरों में देश के विभिन्न हिस्सों की संस्कृतियां, लोगों के चेहरे, उनकी दिनचर्या और सामाजिक जीवन से जुड़े भावनात्मक क्षणों को कैमरे में कैद किया गया था. इन तस्वीरों ने दर्शकों को केवल दृश्य नहीं दिखाये, बल्कि उनके पीछे छिपी मानवीय कहानियों को महसूस करने का अवसर भी दिया.

प्रदर्शनी देखने के लिए जिले के कलाकार, छायाचित्रकार, कला प्रेमी और संस्कृति से जुड़े लोग संग्रहालय परिसर पहुंचे.

30 से अधिक प्रतिभागियों ने सीखी मंजूषा की बारीकियां

उत्सव के दौरान दो दिवसीय मंजूषा चित्रकला कार्यशाला भी आयोजित की गयी. इसका उद्देश्य नयी पीढ़ी को अंग क्षेत्र की पारंपरिक मंजूषा लोककला से जोड़ना रहा.

प्रशिक्षक डॉ. उलूपी झा ने 30 से अधिक प्रतिभागियों को मंजूषा चित्रकला की पारंपरिक शैली, स्वरूप और विषय-वस्तु के बारे में जानकारी दी. प्रतिभागियों को चित्रांकन की बारीकियों से भी अवगत कराया गया.

ऐसी कार्यशालाएं पारंपरिक कला के संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि लोककला तभी आगे बढ़ सकती है जब नयी पीढ़ी उसके बारे में सीखे और उसे अपनी रचनात्मकता के साथ आगे ले जाये.

मंच पर जीवंत हुई बिहुला-विषहरी की लोकगाथा

सांस्कृतिक संध्या में वरिष्ठ लोक कलाकार राजेश झा ने बिहुला-विषहरी की लोकगाथा पर आधारित भगतेन लोकनृत्य की प्रस्तुति दी. लोकनृत्य के माध्यम से कलाकारों ने अंग क्षेत्र की पारंपरिक कथा और सांस्कृतिक भावभूमि को मंच पर उतारा.

इसके बाद कृष्ण क्लब की ओर से बिहुला-विषहरी की लोकगाथा पर आधारित लोकनाट्य प्रस्तुत किया गया. अजय अटल के नेतृत्व में शीतांशु अरुण, निवास मोदी, मनोज कुमार और अन्य कलाकारों ने अभिनय के माध्यम से लोकगाथा के अलग-अलग प्रसंगों को जीवंत किया.

प्रस्तुति के दौरान लोककथा के पात्रों और घटनाओं को मंच पर जिस तरह पेश किया गया, उससे दर्शकों को अंग की पारंपरिक कथा से जुड़ने का अवसर मिला.

मंजूषा हटिया ने भी खींचा ध्यान

दो दिवसीय उत्सव में मंजूषा हटिया भी आयोजित की गयी. इसके जरिये स्थानीय कला और कलाकारों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया. मंजूषा जैसी पारंपरिक कला के लिए ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के साथ संभावित खरीदारों और कला प्रेमियों से जुड़ने का अवसर भी देते हैं.

भागलपुर की सांस्कृतिक पहचान में मंजूषा का विशेष स्थान है. बिहुला-विषहरी की लोकगाथा से इसका गहरा संबंध होने के कारण इस उत्सव में मंजूषा कला का शामिल होना आयोजन के सांस्कृतिक उद्देश्य को और मजबूत करता है.

Bhagalpur News: संरक्षण और कलाकारों के सम्मान का संकल्प

दो दिवसीय बिहुला-विषहरी उत्सव के माध्यम से अंग क्षेत्र की लोक परंपरा को एक ही मंच पर कई कला माध्यमों में प्रस्तुत किया गया. फोटोग्राफी प्रदर्शनी ने आधुनिक कैमरे के जरिये जीवन और संस्कृति को सामने रखा, तो मंजूषा कार्यशाला ने पारंपरिक चित्रकला की तकनीक को नयी पीढ़ी तक पहुंचाया.

वहीं लोकनृत्य और लोकनाट्य ने सदियों पुरानी लोकगाथा को मंचीय रूप दिया. इस तरह उत्सव ने भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत के अलग-अलग पहलुओं को एक साथ जोड़ने का काम किया.

कार्यक्रम का समापन कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों के सम्मान के संकल्प के साथ हुआ. ऐसे आयोजन स्थानीय लोककलाओं को व्यापक पहचान देने के साथ कलाकारों और नयी पीढ़ी के बीच संवाद का माध्यम भी बन सकते हैं.

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लेखक के बारे में

By दीपक कुमार राव

दीपक कुमार राव प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से एक्टिव हैं. प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, कला-संस्कृति व सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं.

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