bhagalpur news. मुनाफा की उम्मीद में 50 फीसदी मक्का रह गया किसानों के पास, अब लागत मूल्य मिलना भी मुश्किल

देश के साउथ में मक्का की बंपर पैदावार के बाद कंपनियों व केंद्र सरकार की ओर से इथेनॉल की सप्लाई ऑर्डर में कटौती के कारण भागलपुर समेत प्रदेश के मक्का किसानों की कमर टूट गयी है

दीपक राव, भागलपुर देश के साउथ में मक्का की बंपर पैदावार के बाद कंपनियों व केंद्र सरकार की ओर से इथेनॉल की सप्लाई ऑर्डर में कटौती के कारण भागलपुर समेत प्रदेश के मक्का किसानों की कमर टूट गयी है. मुनाफा की उम्मीद में 50 फीसदी तक किसानों व व्यापारियों के पास मक्का स्टोरेज रह गया और अब उन्हें लागत मूल्य भी मिलना मुश्किल हो रहा है.

राज्य सरकार के कृषि विभाग के आंकड़े के अनुसार भागलपुर जिले में एक लाख 60 हजार मीट्रिक टन धान, एक लाख मीट्रिक टन मक्का, 58 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है. सेंट्रल गवर्नमेंट की ओर से इथेनॉल की सप्लाई ऑर्डर में अचानक कटौती कर दी गयी. खासकर बिहार के 17 इथेनॉल प्लांट पर अधिक असर पड़ रहा है. प्लांट को कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले किसानों को भी भारी नुकसान होने की आशंका है. किसान मक्का और टूटे चावल की सप्लाई करते थे, जिससे उन्हें नियमित आमदनी होती है. सप्लाई स्थगित होने से आय का यह प्रमुख स्रोत भी प्रभावित होने लगा है. मक्का कारोबारियों ने बताया कि इस कारण भागलपुर के किसानों की ओर से उत्पादित व संग्रहित मक्का की कीमत नहीं मिलने लगी. इसका असर हुआ कि संग्रहित मक्का का वजन 100 टन में पांच टन तक कम हो गया. फिर किसानों की ओर से बैंक व महाजन से ब्याज पर कर्ज लेने पर परेशानी बढ़ गयी है. ऊपर से मूल्य नहीं मिलने पर लागत मूल्य मिलने पर आफत है.

कहते हैं मक्का ट्रेडर्स व किसान

पीरपैंती के मक्का किसान मिथुन तिवारी ने बताया कि पिछले पांच साल से मक्का का मूल्य किसानों को ठीकठाक मिल रहा था. समृद्ध किसानों और ट्रेडर्स द्वारा स्टोर किये गये मक्का का कुछ महीनों बाद बढ़े हुए मूल्य दर भी मिल रहे थे. उन्होंने खुद 45 बीघा खेतों में मक्का की खेती की है. आधा से अधिक मक्का स्टोर है. पिछले साल 2700 रुपये तक रेट मिला था. इस बार 2000 रुपये भी नहीं मिल पा रहा है. इस बार भागलपुर जिला सहित कोशी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मक्का स्टोर हुआ. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा में इस बार बंपर फसल उत्पादन के कारण अचानक मक्के का बाजार नीचे आ गिरा.

नवगछिया क्षेत्र के संतोष गुप्ता ने बताया कि साउथ के इथेनॉल में स्थानीय मक्का को ही प्राथमिकता मिल रही है. बड़े-बड़े स्टार्च, हैंचरिज और फीड मिल अभी कम मूल्य पर मध्य प्रदेश के मक्का को उपयोग में ले रहे हैं. कुल मिलाकर बिहार के किसान और ट्रेडर्स गिरते हुए मक्का के मूल्य से चिंतित और निराश है. निकट भविष्य में इसकी निचली कीमत को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं ढूंढा गया, तो आने वाले साल में जब नया मक्का बाजार में आयेगा तो इसका खामियाजा सभी किसानों को भुगतना पड़ेगा.

पीरपैंती क्षेत्र के मक्का के ट्रेडर्स रमण दुबे ने बताया कि बिहार में इथेनॉल आपूर्ति में कटौती के कारण पैदा हुआ संकट न केवल किसानों, बल्कि व्यापारियों और उद्योग से जुड़े कर्मियों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है. इथेनॉल प्लांट मक्के के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है. प्लांट बंद होने या उत्पादन घटने से मक्के की बाजार में मांग कम हो गयी.

पीरपैंती के मक्का किसान अवध किशोर दुबे ने बताया कि उन्होंने 50 बीघे में मक्का की खेती की थी. उन्होंने 50 फीसदी अधिक मक्का इसलिए नहीं बेचा था कि अधिक से अधिक मुनाफा पर बेचेंगे. अब इथेनॉल कंपनी की ओर से मक्का की डिमांड बहुत कम हो गयी, जो कीमत शुरुआत में मिली थी, उतनी कीमत भी नहीं मिल पा रही है. पहले 2200 रुपये क्विंटल तक बेचे थे. अभी 1800 रुपये मिल रहे हैं, जबकि पिछले साल 2500 से 2700 रुपये तक बिके थे.

किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. उचित भंडारण सुविधाएं न होने पर मक्का खराब हो सकता है, जिससे किसानों का सीधा नुकसान होगा. प्लांट बंद होने से किसानों को समय पर पैसा नहीं मिलेगा, जिससे वे अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य जरूरी चीजें खरीदने में असमर्थ हो सकते हैं. मक्का खरीद और बिक्री से जुड़े स्थानीय व्यापारी (ट्रेडर्स) प्लांट बंद होने से सीधे प्रभावित हो रहे हैं. उनका व्यापार ठप हो जायेगा. गोदामों में रखा मक्का भी नहीं बिक पा रहा है.

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Author: ATUL KUMAR

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