Bhagalpur News: टीबी एमडीआर मरीजों के 1500 सैंपल की जांच नहीं, इलाज में विलंब

मायागंज अस्पताल स्थित कल्चर एंड डीएसटी लैब में पड़े हैं 16 जिले के मरीजों का सैंपल

– मायागंज अस्पताल स्थित कल्चर एंड डीएसटी लैब में पड़े हैं 16 जिले के मरीजों का सैंपल- दो वर्ष से दो प्रयोगशाला प्रावैधिकी व एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पद खाली

– कर्मचारियों की मांग के लिए राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी यक्ष्मा को लिखा गया पत्र

वरीय संवाददाता, भागलपुर

सरकारी स्तर पर भले ही वर्ष 2025 तक बिहार समेत पूरे देश में टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है लेकिन धरातल पर इस अभियान की सफलता को लेकर कई बाधाएं आ रही है. मायागंज अस्पताल स्थित कल्चर एंड डीएसटी में एमडीआर टीबी के संदिग्ध मरीजों के सैंपल की जांच काफी धीमी है. लैब में सैंपल की जांच के लिए महज एक कर्मचारी कार्यरत है. दूसरा कर्मचारी ट्रेनिंग के लिए बेंगलुरु गया है. लैब में भागलपुर समेत आसपास के 16 जिलों के औसतन 75 मरीजों का सैंपल आता है. जबकि एक कर्मचारी करीब 50 सैंपल की ही जांच कर पाता है. कर्मचारी की कमी से रोजाना 20 से 25 सैंपल पेंडिंग हो रहा है. धीरे-धीरे बिना जांच किये सैंपल की संख्या बढ़ कर 1500 के पार पहुंच गयी है.

कई सैंपल खराब होने की आशंका

मामले पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हेड डॉ अमित कुमार ने बताया कि दो वर्ष से दो प्रयोगशाला प्रावैधिकी व एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पद खाली हैं. कर्मचारियों की मांग के लिए राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी यक्ष्मा को पत्र लिखा गया है. कर्मचारी नहीं रहने के कारण मरीजों के मात्र 50 सैंपल रोजाना जांच हो रहे हैं. बिना कर्मचारी के सैंपल जांच में तेजी नहीं आ सकती है. अधिक दिन तक पड़े रहने से सैंपल के खराब होने की आशंका रहती है. वहीं, जांच रिपोर्ट के अभाव में एमडीआर टीबी के संदिग्ध मरीजों का सही तरीके से इलाज भी शुरू नहीं हो सकता है.

मायागंज अस्पताल के अंडर नहीं है लैब

मामले पर अस्पताल अधीक्षक डॉ अविलेश कुमार ने बताया कि यह लैब मायागंज अस्पताल के अंडर में नहीं है. लैब में कर्मियों की तैनाती की जिम्मेदारी जिला यक्ष्मा कार्यालय की है. अधीक्षक ने बताया कि हमलोगों ने कई बार लैब को रेसपाइरेटरी विभाग को सौंपने का आग्रह किये हैं. इस प्रक्रिया के बाद ही मायागंज अस्पताल से जांच के लिए कर्मियों की तैनाती की जा सकती है. उन्होंने बताया कि सिर्फ इस लैब के संचालन की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की है.

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Author: SANJIV KUMAR

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