बिहार : 36 घंटे से गंगा स्थिर, बाढ़ ने बेघर किया, अब बारिश से तंबू में दुबके पीड़ित

36 घंटे से गंगा स्थिर, फिर भी डेंजर लेवल से 58 सेमी ऊपर जलस्तर भागलपुर : बीते गुरुवार शाम छह बजे से गंगा का जलस्तर डेंजर लेवल से 58 सेमी ऊपर स्थिर है. केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार शाम चार बजे तक कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है. इधर, गंगा […]

36 घंटे से गंगा स्थिर, फिर भी डेंजर लेवल से 58 सेमी ऊपर जलस्तर

भागलपुर : बीते गुरुवार शाम छह बजे से गंगा का जलस्तर डेंजर लेवल से 58 सेमी ऊपर स्थिर है. केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार शाम चार बजे तक कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है. इधर, गंगा का जलस्तर 34.26 मीटर पर बह रही है और नये इलाके में पानी का फैलाव हो रहा है. साल 2016 में आयी बाढ़ के रिकॉर्ड से यह अभी भी करीब 46 सेमी नीचे है. इधर, कहलगांव में डेंजर लेवल से 95 सेमी ऊपर गंगा पहुंच कर स्थिर हो गया है. शनिवार रात करीब 10 बजे तक तीन सेमी की वृद्धि होने की संभावना है.
मारवाड़ी कॉलेज हॉस्टल में घुसा बाढ़ का पानी
गंगा नदी में उफान के कारण तटों से सटे कई शैक्षणिक संस्थानों में बाढ़ का पानी घुस गया है. शुक्रवार को भैरवा तालाब के सामने स्थित मारवाड़ी कॉलेज के हॉस्टल परिसर में भी बाढ़ व बारिश का पानी घुस गया है. छात्रों को हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है. बावजूद अबतक हॉस्टल में छात्र रुके हैं. प्रशासनिक भवन, विवि हॉस्पीटल का भी यही हाल रहा. प्रशासनिक भवन तक पहुंचने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.
ट्रिपल आइटी व बीसीइ में पानी और बढ़ा
इधर, ट्रिपल आइटी व भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के मुख्य बिल्डिंग, सभी हॉस्टल में बाढ़ का पानी घुस गया है. गंगा का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो इंजीनियरिंग कॉलेज के अन्य हॉस्टल व मेन बिल्डिंग समेत ट्रिपल आइटी परिसर के इर्द-गिर्द भी जलजमाव की स्थिति हो जायेगी. ट्रिपल आइटी के शिक्षक धीरज कुमार ने बताया कि दोनों काॅलेज के उत्तरी छोर से बिल्कुल ही सटकर गंगा तेज रफ्तार में बढ़ रही है.

कई सरकारी स्कूल में अबतक बाढ़ का पानी : वहीं, नगर निगम क्षेत्र के कई सरकारी स्कूल भी बाढ़ का पानी से घिर गया है. नाथनगर के प्राथमिक विद्यालय लालूचक, सीएमएस प्राथमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय उपकार छठ घाट, प्राथमिक विद्यालय दिलदारपुर, मध्य विद्यालय बैरिया समेत कई स्कूलों तक छात्रों व शिक्षकों का पहुंच पाना मुश्किल हो गया है.

हवाई अड्डा में बारिश से आफत : हवाई अड्डा में कोई छत भी नहीं होने से खुले मैदान में प्लास्टिक के छोटे-छोटे तंबू में लोग पूरे परिवार के साथ बारिश से बचने की कोशिश में लगे थे. तंबू में जगह कम पड़ रही थी. प्रत्येक तंबू में परिवार के सभी सदस्य सिकुड़ कर बैठे हुए थे. तंबू में ही बारी-बारी से सोते हैं. पशुओं को बारिश के कारण भारी परेशानी हो गयी है. लगातार होती बारिश में पशुओं को खुले में बांधना मजबूरी थी.

राहत कैंप को लेकर दिशा निर्देश
राहत कैंप के आगे बाढ़ 2019 अंकित हो स्थल व प्रखंड का नाम वाला बैनर लगायें
तीन बार खाना, इसमें दो बार भोजन व सुबह के समय नाश्ता.
पानी पिलाने के लिये हैल्पर और महिला पुरुष का अलग-अलग शौचालय
राहत कैंप में दर्री व चटाइ की वयवस्था और नवजात बच्चे के लिए अलग से दूध
कार्रवाई को ले निर्देश
अनुमंडल पदाधिकारी आपदा के समय कोई भी कर्मी, पदाधिकारी द्वारा आनाकानी करने पर आपदा अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करेंगे.
अंचलाधिकारी प्रत्येक राहत शिविर में पालीवार कर्मी की प्रतिनियुक्त करके उसका मोबाइल नंबर जिला स्तर पर दें.

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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