भागलपुर : गुरुवार को सदर अस्पताल पहुंचे मरीज और उनके परिजन घंटों डॉक्टर का इंतजार करते रह गये. समय से सारे विभाग तो खोल दिये गये, लेकिन यहां से डॉक्टर नदारद थे. जनरल ओपीडी में इकलौते चिकित्सक डॉ मनोज कुमार यादव अपनी ड्यूटी पर थे और डेढ़ घंटे में नौ मरीजों को देख चुके थे.
सामान्य चिकित्सक का है अभाव, बात हो रही स्मार्ट अस्पताल बनाने की : एक ओर जहां सदर अस्पताल को स्मार्ट सिटी के तहत ही स्मार्ट बनाने की तैयारी चल रही है, लेकिन हकीकत यह है कि, यहां डॉक्टरों का घोर अभाव है. इसे लेकर अस्पताल का सर्वे भी कराया जा चुका है. लेकिन इसके लिए स्मार्ट चिकित्सा व्यवस्था भी जरूरी है.
बिगड़ती जा रही है सदर अस्पताल की व्यवस्था : लोकनायक जयप्रकाश नारायण सदर अस्पताल की व्यवस्था दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है. जर्जर भवन में इमरजेंसी मरीजों का इलाज चल रहा है, तो मुख्य द्वार का बाउंड्री वाल भी टूटकर गिर गया है. इससे हमेशा यह अस्पताल असुरक्षित है.
ओपीडी में 32 चिकित्सकों की है जरूरत, पदस्थापित हैं सिर्फ छह : सदर अस्पताल की ओपीडी में कम से कम 32 चिकित्सक की आवश्यकता है, तभी एक जिला अस्पताल की वरीयता को यह पूरा कर सकता है. यहां के वरिष्ठ चिकित्सकों का मानना है कि सरकार की ओर से अस्पताल की उपेक्षा की जा रही है.
कुछ डॉक्टर गये इंटरव्यू देने, तो कुछ थे छुट्टी पर, एक डॉक्टर ही थे ड्यूटी पर
मरीजों का दर्द
गोराडीह के उस्तू गांव के शंकर दास ने बताया कि उनकी पत्नी सकुना देवी की आंख का ऑपरेशन कराना है. वे पहले भी लौट चुके हैं. आज भी चिकित्सक को ढूंढ़ने में परेशान रहे. कोई चिकित्सक नहीं दिख रहा है. वहीं बांका मड़नी के मरीज पंकज कुमार अपना दांत दिखाने के लिए आये थे. दांत विभाग का कमरा खाली था. वहीं अलीगंज से रामचरण साह ने बताया कि उनके पोता को सर्दी-खांसी और बुखार हो गया है, लेकिन डॉक्टर नहीं होने पर उन्हें अब प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ेगा.
कोई गया इंटरव्यू देने, तो कोई था छुट्टी पर
सदर अस्पताल ओपीडी में कार्यरत सर्जन डॉ अभिषेक, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राकेश, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ आभा सिन्हा पटना इंटरव्यू देने के लिए गये हैं. जबकि डॉ दीनानाथ ने नाइट ड्यूटी की थी और डॉ कुंदन ने दोपहर में ड्यूटी की, तो वे ऑफ पर थे. वहीं, डॉ विनय कुमार व डॉ यूके सिंह छुट्टी पर थे.
केवल एनेस्थिसिया सह मेडिकल ऑफिसर डॉ मनोज कुमार यादव, डॉ एके मंडल व डॉ सत्यदीप कार्यरत थे. डॉ एके मंडल सदर अस्पताल के प्रभारी हैं, जो प्रशासकीय कार्यों में व्यस्त थे और डॉ दीनानाथ भी देरी से पहुंचे थे. इकलौते डॉ मनोज कुमार यादव भी समय से आधा घंटा देरी से पहुंचे.
