भागलपुर : सदर अस्पताल में संविदा पर बहाल चार चिकित्सकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. चारों डॉक्टर मायागंज अस्पताल में तीन साल के लिए योगदान देंगे. सिविल सर्जन डॉ एके ओझा ने बताया कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी हो गयी है. चिकित्सक के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है. कुल 11 चिकित्सक अस्पताल में बच गये हैं, जिसमें एक ने पूर्व से ही वीआरएस का आवेदन दे रखा है. संविदा पर इन चिकित्सकों की बहाली हुई थी.
भागलपुर : सदर के चार चिकित्सकों ने दिया इस्तीफा
भागलपुर : सदर अस्पताल में संविदा पर बहाल चार चिकित्सकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. चारों डॉक्टर मायागंज अस्पताल में तीन साल के लिए योगदान देंगे. सिविल सर्जन डॉ एके ओझा ने बताया कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी हो गयी है. चिकित्सक के लिए सरकार को पत्र लिखा गया […]

चिकित्सक ने बेहतर भविष्य के लिए दिया इस्तीफा : सिविल सर्जन डॉ ओझा ने बताया कि सदर अस्पताल में कार्यरत डॉ अभिमन्यु कुमार, डॉ प्रियंका कुमारी, डॉ प्रियंका रानी, डॉ मिथलेश कुमार ने इस्तीफा दे दिया है. इन सभी का चुनाव मायागंज अस्पताल के लिए हो गया है. सभी तीन साल तक अपना योगदान यहां देंगे. इन सभी का तबादला नहीं हुआ है.
सभी की नयी रेसीडेंसी चिकित्सक के रूप में नियुक्ति हुई है. अब अस्पताल में 11 चिकित्सक बचे है. जिसमें एक महिला चिकित्सक ने वीआरएस का आवेदन पूर्व में ही दे रखा है. चार माह पहले डॉ एके दास को भी सदर से मायागंज अस्पताल में तबादला किया गया था. यहां इनको उपाधीक्षक पद का भार दिया गया है. बताया जा रहा है कि सदर अस्पताल से बेहतर भविष्य मायागंज अस्पताल में इन चिकित्सकों को मिलेगा. इस वजह से इन लोगों ने यह निर्णय लिया.
11 चिकित्सक बचे सदर में एक ने पूर्व में डाल रखा है वीआरएस का आवेदन
मायागंज अस्पताल में सोमवार को ओपीजी मशीन आ गयी. पीपीपी मोड़ में यह सेवा मरीजों को प्रदान किया जायेगा. इसके लिए मरीजों को नाम मात्र का शुल्क देना होगा. यह सेवा जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में अब तक नहीं थी. दंत चिकित्सक डॉ मनोज कुमार ने बताया कि दंत विभाग में रोजाना 50 से ज्यादा मरीजों दांत, मसूढ़े व जबड़े का रोग लेकर आते थे.
इनको ओपीजी कराने के लिए दूसरी जगह भेजा जाता था. इसमें इनको दो हजार तक खर्च करना पड़ता था. नयी मशीन से मरीजों को इससे मुक्ति मिल जायेगी. वहीं मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ आरसी मंडल ने बताया कि मशीन को एक सप्ताह में इंस्टाल कर दिया जायेगा. इसके बाद मरीजों को इसकी सुविधा का लाभ दिया जायेगा.
दूसरी और मशीन को लगाने के लिए जिस वायर की जरूरत है वह अब तक ओपीडी में नहीं लगाया गया है. जहां कंप्यूटर को रखा जाना है वहां नल लगा हुआ है. इसको हटाने के बाद ही मशीन लगायी जा सकती है.