एनआइएफ और बीएयू के बीच कृषि व आइटी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर करार की तैयारी

भागलपुर : बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी सबौर (बीएयू) और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान गांधीनगर (एनआइएफ) ने मंगलवार को कृषि, आइटी, संचार समेत अन्य सेक्टर से जुड़ी टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर करने पर करार की तैयारी में हैं. बीएयू परिसर में राष्ट्रीय नवाचार किसान कांग्रेस के मंच पर कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह ने घोषणा की, हम एनआइएफ से […]

भागलपुर : बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी सबौर (बीएयू) और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान गांधीनगर (एनआइएफ) ने मंगलवार को कृषि, आइटी, संचार समेत अन्य सेक्टर से जुड़ी टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर करने पर करार की तैयारी में हैं. बीएयू परिसर में राष्ट्रीय नवाचार किसान कांग्रेस के मंच पर कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह ने घोषणा की, हम एनआइएफ से हाथ मिलाने की आस लगाये बैठे हैं.
इसपर कार्यक्रम में शरीक हुए एनआइएफ के वैज्ञानिक व नवप्रवर्तन अधिकारी हरदेव चौधरी ने कहा बीएयू के साथ एमओयू पर साइन करने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. सबौर से गांधीनगर जाने के बाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग से जुड़े कागजात बीएयू प्रशासन को भेजे जाएंगे. मौके पर बीएयू के कुलपति ने नवप्रवर्तन अधिकारी हरदेव चौधरी से कहा कि, जितनी जल्दी हो आप इस प्रक्रिया को पूरा करने की पहल शुरू कर दें.
दो लाख इनोवेशन की जानकारी मिलेगी बीएयू को: नवप्रवर्तन अधिकारी हरदेव चौधरी ने बताया कि, एनआइएफ केंद्र सरकार की साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की एक ऑटोनोमस इकाई है. एनआइएफ एक वृहद डेटाबेस बनाने में सफल रहा है, जिसमें हनी बी नेटवर्क का प्रमुख योगदान है.
इस डेटाबेस में देश के 575 से अधिक जिलों से 2, 11,600 से अधिक आइडिया, नवप्रवर्तन एवं पारंपरिक ज्ञान व व्यवहार शामिल हैं. शोध एवं विकास संस्थानों के साथ सहयोग द्वारा एनआइएफ कोशिश करता है कि, इन नवप्रवर्तनों का प्रमाणीकरण हो एवं इन्हें मूल्यवर्द्धित प्रौद्योगिकियों व उत्पादों में तब्दील किया जाए. उन्होंने बताया कि कृषि, आइटी व संचार से जुड़े सभी जानकारी बीएयू को उपलब्ध कराया जायेगा. साथ ही बीएयू के रिसर्च, इनोवेशन से देशभर के किसानों और शोधार्थियों को परिचय कराया जायेगा.
इनावेशन को इंजीनियरिंग कॉलेज से सपोर्ट
कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि किसानों के इनोवेशन को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जोड़ने के लिए भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से मदद मांगी जायेगी. इस पद्धति से अपने मोबाइल के माध्यम से कृषि यंत्रों और कृषि इनोवेशन को संचालित कर सकते हैं. इस समय इंजीनियरिंग कॉलेज में सेंसर से जुड़े कई रिसर्च हो रहे हैं.

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