चार इंजीनियर घेरे में, होगी कार्रवाई

भागलपुर : हाइकोर्ट के सड़क निर्माण व मरम्मत पर दिये निर्देश के खिलाफ भागलपुर शहर में एनएच- 80 ( किमी 129 से 135 तक) के निर्माण में हुई अनियमितता और उसकी निगरानी जांच की एक्शन टेकन रिपोर्ट में, तभी के चार इंजीनियर घेरे में आये हैं. इनमें तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, एनएच पथ प्रमंडल भागलपुर संप्रति […]

भागलपुर : हाइकोर्ट के सड़क निर्माण व मरम्मत पर दिये निर्देश के खिलाफ भागलपुर शहर में एनएच- 80 ( किमी 129 से 135 तक) के निर्माण में हुई अनियमितता और उसकी निगरानी जांच की एक्शन टेकन रिपोर्ट में, तभी के चार इंजीनियर घेरे में आये हैं.
इनमें तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, एनएच पथ प्रमंडल भागलपुर संप्रति पूर्व बिहार पथ अंचल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण) लालमोहन प्रजापति, तत्कालीन सहायक अभियंता, एनएच पथ प्रमंडल भागलपुर संप्रति नगर विकास व आवास विभाग के सहायक अभियंता अजय कुमार पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता, एनएच पथ प्रमंडल भागलपुर संप्रति योजना व विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता शंभू कुमार, तत्कालीन कनीय अभियंता, एनएच पथ प्रमंडल भागलपुर संप्रति एनएच पथ प्रमंडल, अररिया के कनीय अभियंता शामिल हैं. पटना हाइकोर्ट से उक्त खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलाने के लिए रिपोर्ट भेजा जायेगा. जहां से अनुमोदन मिलने पर उक्त पर कार्रवाई शुरू होगी.
हाइकोर्ट में सुनवाई के दौरान मांगी थी एक्शन टेकन रिपोर्ट: हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ में लोकहित याचिका पर 11 जुलाई को सुनवाई हुई थी. उसमें याचिकाकर्ता ने बताया कि, भागलपुर शहर में रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट तक जो सड़क का निर्माण किया गया, उसमें कोर्ट के पूर्व निर्देश का पालन नहीं किया और काफी अनियमितता बरती गयी. इसकी शिकायत मिलने पर निगरानी विभाग को जांच सौंपा गया.
निगरानी विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. जांच रिपोर्ट पर राज्य सरकार ने कोई भी कार्रवाई अभी तक नहीं की. हाइकोर्ट ने सड़कों के निर्माण और उसकी ऊंचाई के संबंध में जो दिशा निर्देश जारी किया गया, उसका अनुपालन नहीं किया गया. तभी निगरानी विभाग ने अदालत को बताया था कि, इस पूरे मामले की जांच कर उसने रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दिया. अब उस रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार को ही कार्रवाई करनी है.
एनएच ने पेश की एक्शन टेकन रिपोर्ट
आरोपित बनाये गये इंजीनियर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का संचालन पदाधिकारी उत्तर बिहार उपभाग पथ निर्माण के मुख्य अभियंता व अभियंता प्रमुख कार्यालय के सहायक अभियंता (अवकाश रक्षित) श्यामदेव प्रसाद यादव को प्रस्तुतिकरण पदाधिकारी के रूप में नियुक्ति.
आरोपित तत्कालीन कार्यपालक अभियंता लालमोहन प्रजापति ने अनुरोध किया कि, हाइकोर्ट के पारित अंतिम आदेश होने तक उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं किया जाये.
कई काम नहीं हुए थे, फिर भी कर दिया था कांट्रैक्टर को भुगतान
निगरानी की तकनीकी टीम ने पिछले साल जुलाई में पटल बाबू रोड को ऊंचा बनाने व इससे आसपास के घरों में जलजमाव की समस्या एवं सड़क निर्माण की गुणवत्ता समेत कई बिंदुओं की जांच की थी. तकनीकी परीक्षण सेल के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार सिंह ने जेल रोड में सड़क का नमूना भी लिया था. मामले की जांच निगरानी एसपी संजय कुमार ने की थी. जांच में यह बात सामने आयी थी कि, टेंडर में मुंदीचक मोड़ से इंजीनियरिंग कॉलेज के बीच सड़क निर्माण के साथ जेल रोड तक नाला निर्माण भी शामिल था. पटल बाबू रोड ऊंचा बना देने से आसपास के घरों में जलजमाव की समस्या रहती है. दूसरी ओर नाला निर्माण नहीं किया. इसके बावजूद कार्यपालक अभियंता लाल मोहन प्रजापति द्वारा संवेदक को राशि का भुगतान भी कर दिया था.
घेरे में आये चार इंजीनियरों से भी हुई थी पूछताछ
पुरानी सड़क उखाड़ कर नयी सड़क बनानी थी, लेकिन ऐसा नहीं करने से सड़क ऊंची हो गयी. इस मामले में एनएच-80 के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता लाल मोहन प्रजापति, सहायक अभियंता अजय कुमार पांडेय, कनीय अभियंता विभाकर कुमार समेत विभाग के आठ-नौ लोगों से निगरानी ने पूछताछ की थी. सभी से लिखित बयान भी लिया गया है.

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