उद्घाटन से पहले ही 91 करोड़ की फोरलेन सड़क पर जलजमाव, पहली ही बारिश में तालाब बना जीएमसीएच का मुख्य द्वार

बेतिया में 91 करोड़ की लागत से बन रही नई फोरलेन सड़क उद्घाटन से पहले ही पहली मानसूनी बारिश में ठप पड़ गई. जीएमसीएच के मुख्य द्वार पर जलभराव ने ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोल दी है. मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

Bettiah Fourlane Waterlogging: शहर की महत्वाकांक्षी 91 करोड़ रुपये की लागत से बन रही पथरी घाट-जीएमसीएच-बरवत सेना फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है और इसका उद्घाटन होना भी बाकी है. लेकिन पहली ही मानसूनी बारिश ने इस बड़ी परियोजना की तैयारियों की पोल खोल दी है. शुक्रवार को हुई तेज बारिश के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) के मुख्य प्रवेश द्वार तथा ऑडिटोरियम की ओर बन रहे नवनिर्मित मार्ग पर भारी जलजमाव हो गया. सड़क का एक बड़ा हिस्सा तालाब की शक्ल में तब्दील हो गया. जिससे अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों. उनके तीमारदारों और मेडिकल कॉलेज के छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

जिले के सबसे बड़े अस्पताल का रास्ता ब्लॉक, एंबुलेंस की आवाजाही भी हुई प्रभावित

जीएमसीएच चंपारण क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है. जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में अस्पताल के मुख्य प्रवेश मार्ग पर पानी जमा होने से पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया. चारपहिया वाहनों और सबसे महत्वपूर्ण एंबुलेंस की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई. कई तीमारदार अपने मरीजों को पानी के बीच से होकर अस्पताल के भीतर ले जाने को मजबूर दिखे. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण अभी अंतिम चरण में है. ऐसे में पहली ही बारिश में घुटने भर पानी जमा होना यह दर्शाता है कि जलनिकासी के लिए बनाई गई ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह फेल है. यदि इस पर अभी ध्यान नहीं दिया गया. तो पूरी बरसात में स्थिति और भयावह हो जाएगी.

करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल, उद्घाटन से पहले तकनीकी जांच की मांग

यह फोरलेन सड़क पथरी घाट. जीएमसीएच और बरवत सेना को जोड़ने वाली शहर की सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना है. इसके पूरा होने के बाद शहर के यातायात को नई दिशा मिलने और अस्पताल तक जाममुक्त आवागमन की उम्मीद थी. हालांकि. निर्माण पूरा होने से पहले ही सड़क पर जलभराव ने विभागीय दावों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. स्थानीय बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने निर्माण एजेंसी व संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क के अंतिम हस्तांतरण और उद्घाटन से पहले ड्रेनेज सिस्टम की तकनीकी जांच कराई जाए. जहां-जहां पानी जमा हो रहा है. वहां तत्काल सुधार कराया जाए ताकि करोड़ों रुपये की इस सरकारी योजना का लाभ जनता को मिल सके.


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