बेतिया: मानसून में टापू बन जाते हैं वाल्मीकिनगर के 4 गांव, नाव के सहारे जिंदगी, सड़क-पुल का वर्षों से इंतजार

बगहा-2 प्रखंड के सीमावर्ती गांवों में मानसून आते ही जीवन नारकीय हो जाता है. गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से चकदहवा समेत चार गांव टापू बन जाते हैं, जिससे ग्रामीणों का मुख्य सड़क से संपर्क टूट जाता है. सड़क और पुल की सुविधा न होने के कारण आवागमन के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ती है.

बेतिया: बगहा-2 प्रखंड के सीमावर्ती गांवों में मानसून शुरू होते ही ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं. लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत के चकदहवा समेत चार गांवों के हजारों लोगों के लिए गंडक का बढ़ता जलस्तर हर साल परेशानी का कारण बनता है. नदी में पानी बढ़ते ही गांवों का मुख्य सड़क से संपर्क टूट जाता है और पूरा इलाका टापू में तब्दील हो जाता है.

सड़क और पुल की सुविधा नहीं होने के कारण बारिश के दौरान ग्रामीणों को आवागमन के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ती है. वाल्मीकिनगर से करीब 10 किलोमीटर दूर चकदहवा गांव तक अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है.

पुल नहीं होने से दो किलोमीटर जंगल-पगडंडी से गुजरते हैं ग्रामीण

चकदहवा तक पहुंचने वाले नाले पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर तक जंगल और पगडंडी के रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है. बारिश के मौसम में यह रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है, जिससे आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है.

भेड़िहारी तक सड़क की सुविधा है, लेकिन उसके आगे का रास्ता बारिश में बेहद दुर्गम हो जाता है. ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर इलाज और जरूरी कामों के लिए मुख्य सड़क तक पहुंचना चुनौती बन जाता है.

गंडक की धारा बदली, सैकड़ों एकड़ जमीन नदी में समाई

गंडक के दियारा क्षेत्र में बसे चकदहवा में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश और बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ जाता है. चकदहवा, झंडू टोला और बिन टोली समेत निचले इलाकों में पानी भर जाता है.

कई परिवारों को घरों के भीतर मचान बनाकर रहने को मजबूर होना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार, करीब एक दशक पहले तक गंडक की धारा गांव से लगभग आधा किलोमीटर दूर बहती थी. अब नदी की धारा गांव की ओर बढ़ गयी है.

लगातार कटाव के कारण सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि कटावरोधी कार्य कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल सका है.

बाढ़ में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था चरमराती

सड़क के अभाव में बाढ़ के दौरान एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. गंभीर मरीजों को चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. वहीं, जलजमाव और कीचड़ के कारण बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है.

ग्रामीण गुलाब अंसारी, छट्ठू राय, नंदू राम, मुकेश राम, इस्लाम मियां, भीमराम, ज्ञानचंद खटीक, छत्तर राय और पट्टू राम ने प्रशासन से तत्काल नाव की व्यवस्था कराने की मांग की है. इसके साथ ही ग्रामीणों ने पक्की सड़क, पुल और स्थायी कटावरोधी कार्य कराने की मांग उठायी है.

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By Prabhat khabar news desk

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