8 बाघों से 60+ तक का सफर! वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई उम्मीदें

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 60 के पार पहुंचने के संकेत मिले हैं. अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन विभाग नई रिपोर्ट जारी कर सकता है. हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.

Valmiki Tiger Reserve: बिहार के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से वन्यजीव संरक्षण को लेकर उत्साहजनक संकेत मिल रहे हैं. 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वन विभाग बाघों की नई गणना से जुड़ी आधिकारिक रिपोर्ट जारी कर सकता है. हालांकि विभाग ने अब तक नई संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

सूत्रों के अनुसार हालिया कैमरा ट्रैप सर्वे में कई नए शावकों की मौजूदगी दर्ज हुई है. इससे वीटीआर में बाघों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. अंतिम आधिकारिक आंकड़ा वन विभाग की रिपोर्ट जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.

2010 में सिर्फ 8 बाघ, अब 60 के पार पहुंचने के संकेत

राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन विभाग की 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार वीटीआर में 54 बाघ दर्ज किए गए थे.

सूत्रों और वन विभाग के नवीनतम आकलन के आधार पर वर्ष 2026 में बाघों की संख्या 60 से अधिक होने तथा 8 से ज्यादा नए शावकों की मौजूदगी का अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

ऐसे बढ़ता गया बाघों का कुनबा

वर्षबाघों की संख्या
20108-10
201428
201831
2022-23 (NTCA)54
202660+ (आधिकारिक पुष्टि शेष)

संरक्षण की मेहनत ने बदली तस्वीर

एक समय ऐसा था जब वर्ष 2010 में वीटीआर में बाघों की संख्या घटकर महज 8 से 10 रह गई थी. उस समय बाघों के अस्तित्व को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही थी.

वन विभाग का कहना है कि बेहतर संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और वनकर्मियों की लगातार निगरानी से हालात बदले हैं. आज वाल्मीकि टाइगर रिजर्व देश के तेजी से उभरते टाइगर रिजर्व में अपनी पहचान बना चुका है.

450 ग्रीन सोल्जर दिन-रात कर रहे सुरक्षा

वीटीआर के जंगलों में करीब 450 ग्रीन सोल्जर (वनकर्मी) चौबीसों घंटे गश्त कर रहे हैं. नियमित पेट्रोलिंग, कैमरा ट्रैप निगरानी, नेपाल सीमा पर विशेष चौकसी और अवैध शिकार पर सख्ती से संरक्षण व्यवस्था मजबूत हुई है.

बेहतर कार्य करने वाले वनकर्मियों और सुरक्षा बलों को समय-समय पर सम्मानित भी किया जाता है.

बाघों की संख्या बढ़ने के पीछे क्या हैं कारण?

वन अधिकारियों के अनुसार बाघों की बढ़ती संख्या के पीछे कई महत्वपूर्ण कदम हैं.

जंगल में बड़े पैमाने पर ग्रासलैंड विकसित किए गए, जिससे चीतल, सांभर, हिरण, खरगोश जैसे शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ी और बाघों को पर्याप्त प्राकृतिक शिकार मिलने लगा.

इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में रेत और पत्थर के खनन पर रोक, बेहतर आवास प्रबंधन और प्रभावी संरक्षण रणनीति ने भी अनुकूल वातावरण तैयार किया.

पर्यटन को भी मिल रहा फायदा

बाघों की बढ़ती संख्या का असर पर्यटन पर भी दिखाई दे रहा है. जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को पहले की तुलना में बाघों के दर्शन होने की संभावना बढ़ी है.

इसी वजह से देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक वाल्मीकिनगर और मगूराहा पहुंच रहे हैं. इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर होंगे जागरूकता कार्यक्रम

29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वीटीआर के विभिन्न वन क्षेत्रों में कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

इस दौरान स्कूली बच्चों के लिए निबंध लेखन, चित्रांकन और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी. वन विभाग के अधिकारी विद्यार्थियों को बाघ संरक्षण, जैव विविधता, वन पारिस्थितिकी और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के महत्व की जानकारी देंगे.

आधिकारिक रिपोर्ट पर रहेगी नजर

वन विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है. ऐसे में 60 से अधिक बाघ और नए शावकों की संख्या फिलहाल प्रारंभिक आकलन और सूत्रों पर आधारित है. अंतिम और आधिकारिक आंकड़े अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर जारी होने वाली रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे.


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By Jay prakash verma

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