Valmikinagar Eco Tourism: भारत-नेपाल सीमा पर नारायणी (गंडक) नदी के पावन तट पर स्थित वाल्मीकि धाम आज धार्मिक आस्था. प्राकृतिक सौंदर्य और ईको-टूरिज्म का अद्भुत केंद्र बनकर उभर रहा है. हर वर्ष बिहार. उत्तर प्रदेश. झारखंड. पश्चिम बंगाल समेत देश के विभिन्न राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं. वहीं. दूसरी ओर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के घने जंगल. ऊंचे पर्वत. खूबसूरत झरने और दुर्लभ वन्यजीव प्रकृति प्रेमियों व पर्यटकों को रोमांच से सराबोर कर देते हैं. आस्था और प्रकृति का यह अनूठा संगम देश-दुनिया के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.
श्रीमद्भागवत पुराण की कथा से जुड़ा है इतिहास, नेपाली पैगोडा शैली में बना है गजेंद्र मोक्ष मंदिर
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार. इसी पावन भूमि पर गजेंद्र (हाथी) और ग्राह (मगरमच्छ) के बीच भीषण संघर्ष हुआ था. तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर गजेंद्र को मोक्ष प्रदान किया था. यही कारण है कि यह स्थल गजेंद्र मोक्ष धाम के रूप में विश्वभर के श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है. धाम परिसर में महर्षि वाल्मीकि आश्रम. शीशमहल. शिव-पार्वती मंदिर. नरदेवी माता मंदिर. जटाशंकर धाम और कालेश्वर मंदिर स्थित हैं. मंदिर के उत्तराधिकारी स्वामी श्रीकृष्ण प्रपन्नाचार्य के अनुसार गजेंद्र मोक्ष मंदिर का निर्माण नेपाली पैगोडा शैली और दक्षिण भारतीय वास्तुकला के अद्भुत समन्वय से किया गया है. यह भारतीय और नेपाली सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है.
नारायणी गंडकी महाआरती बनी सबसे बड़ी आध्यात्मिक पहचान
धाम की सबसे बड़ी आध्यात्मिक पहचान नारायणी गंडकी महाआरती बन चुकी है. प्रत्येक पूर्णिमा की संध्या को नारायणी नदी के तट पर होने वाली भव्य महाआरती में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. दीपों की अलौकिक छटा और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है. वर्ष 2014 से प्रारंभ इस महाआरती के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है. धार्मिक महत्व के साथ-साथ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की जंगल सफारी भी पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है. सफारी के दौरान बाघ. तेंदुआ. भालू. गौर. हिरण और मगरमच्छों का दीदार रोमांच को कई गुना बढ़ा देता है. यह अद्भुत संगम वाल्मीकि धाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिला रहा है.
