जीएमसीएच में मरीज की मौत पर हंगामा, लापरवाही व दुर्व्यहार को लेकर परिजन व इंटर्न आमने-सामने, कई घंटे स्वास्थ्य सेवा बाधित

राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जीएमसीएच) में शनिवार की सुबह मरीज की मौत पर जमकर हंगामा हुआ.

– परिजनों का आरोप इलाज में बरती गई लापरवाही, चिकित्सा कर्मियों ने कहा नर्सिंग ऑफीसर के साथ हुई बदसलूकी

– नर्सिंग आफीसर के साथ मारपीट करने का आरोप, परिजनों को भी दौड़ाकर पीटा गया

– अस्पताल प्रबंधन के बीच बचाव के बाद शांत हुआ मामला, चिकित्सा सेवा बहाल

बेतिया . राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जीएमसीएच) में शनिवार की सुबह मरीज की मौत पर जमकर हंगामा हुआ. एक तरफ जहां मृत मरीज के आक्रोशित परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर बवाल करने लगे. वहीं दूसरी तरफ जीएमसीएच के एक नर्सिंग ऑफिसर के साथ बदसलूकी का आरोप लगाकर चिकित्सा कर्मी और इंटर्न डॉक्टर्स भड़क गये और चिकित्सा सेवा बाधित कर दी. इससे अस्पताल में अफरातफरी मच गई. आरोप है कि इस दौरान नर्सिंग आफीसर की पिटाई कर दी गई. जबकि परिजनों को भी चिकित्साकर्मियों ने दौड़ाकर पीटा. घटना के संबंध में बताया जाता है कि बानुछापर देवनगर निवासी स्व नृपेंद्र तिवारी के 35 वर्षीय पुत्र प्रांजय कुमार तिवारी को शुक्रवार की शाम तबियत बिगड़ने पर परिजन जीएमसीएच लेकर पहुंचे थे. कुछ दिनों से उनकी तबियत गड़बड़ थी, इलाज के दौरान शनिवार की सुबह उनकी मौत हो गई. मौत की सूचना मिलते ही परिजन भड़क उठे और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सी ब्लॉक के फर्स्ट फ्लोर स्थित आइसोलेशन वार्ड में हंगामा करने लगे. आरोप है कि इस दौरान महिला नर्सिंग ऑफिसर और जूनियर डॉक्टर के साथ दुव्यर्वहार किया गया. जिसके कारण अस्पताल कर्मी तथा चिकित्सक भी उग्र हो गये. वहीं कर्मियों ने भी हमलावरों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, जिसके बाद आक्रोशित परिजन शव छोड़कर मौके से फरार हो गये. घटना की सूचना अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को दी. नगर पुलिस के साथ एसएसबी जवान भी मौके पर पहुंचे और स्थिति नियंत्रित करने में जुट गये. इधर घटना के बाबत अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुधा भारती ने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर्स द्वारा यह मांग की जा रही थी कि दोषी हमलावरों पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई हो. हालांकि मामले को सुलझा लिया गया है. परिस्थितियां सामान्य कर ली गई हैं.

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परिजनों ने कहा, शिकायत के बाद भी बरती गई लापरवाही

इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतक के परिजन के रूप में मौजूद पड़ोसी अभिनव कुमार तिवारी ने बताया कि इलाज में लापरवाही की गई है. मरीज को तीन दिन से बुखार था, बाद में जांच करने पर वह टाइफाइड निकला. लेकिन यहां लाने पर इलाज में लापरवाही बरती गई. जिस कारण स्थिति और बिगड़ गई बार-बार मरीज को देखने के लिए नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर से कहा गया. लेकिन कोई इसे गंभीरता से नहीं ले रहा था.

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बाल पकड़कर खींचा, मोबाइल और चेन छीना : नर्सिंग ऑफिसर

अधीक्षक और नगर थाना को दिये आवेदन में महिला नर्सिंग ऑफिसर ने बताया है कि ड्यूटी के दौरान किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है. आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर के साथ मरीज को सीपीआर भी दिया गया. लेकिन पहले से उसकी स्थिति गंभीर थी. निजी क्लीनिक में उसका पूर्व से इलाज चल रहा था. लेकिन मरीज की मृत्यु होने के बाद परिजनों द्वारा उसका बाल पकड़ कर खींचा गया तथा दुपट्टे को उसके गले में लपेट दिया गया. परिजन में से किसी ने उसका मोबाइल और सोने की चेन खींच लिया.

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कई घंटे तक बंद रही इमरजेंसी व ओपीडी सेवा

उधर हमले से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने के बाद अस्पताल के चिकित्सक व नर्सिंग कर्मी आक्रोशित हो गये. उन्होंने कार्य बहिष्कार कर दिया. जिससे करीब चार घंटे तक इमरजेंसी व ओपीडी सेवा पूरी तरह बाधित रही. स्वास्थ्य सेवा बाधित होने के बाद अन्य मरीज और उनके परिजन परेशान दिखें. अस्पताल कर्मियों का कहना था कि यह कोई पहला वाक्या नहीं है, जब मरीज के परिजनों द्वारा हंगामा किया गया है. गंभीर स्थिति में वे लोग मरीज को लाते हैं. और उसके बाद अस्पताल के कर्मी ही दोषी बन जाते हैं. जब तक हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे कार्य पर नहीं लौटेंगे. उपद्रव की सूचना पाकर जीएमसीएच अधीक्षक डॉ. सुधा भारती, उपाधीक्षक डॉ. दिवाकांत मिश्रा और नगर थाना की पुलिस टीम स्थिति को शांत कराने में जुट गई. काफी समझाने बुझाने और सुरक्षा का भरोसा देने के बाद चिकित्सक और स्टाफ को कर्तव्य पर लौट आयें. इसके बाद इमरजेंसी और ओपीडी सेवा पुनः शुरू हो सकी.

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Author: DIGVIJAY SINGH

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