प्रतिकूल स्थिति में देश के लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने वाले अद्वितीय राजनेता रहे हैं सरदार पटेल : प्रो.रवींद्र

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय में योगा क्लब के तत्वावधान में “भारतीय लोकतंत्र को संबल प्रदान करने में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान”विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई.

बेतिया. राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय में योगा क्लब के तत्वावधान में “भारतीय लोकतंत्र को संबल प्रदान करने में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान”विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई. बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के डीन सह कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) रवींद्र कुमार चौधरी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल भारतीय लोकतंत्र के सुदृढ़ स्तंभ रहे हैं. उन्होंने आजादी के बाद प्रतिकूल परिस्थिति में देश के राजनीतिक,प्रशासनिक और सामाजिक एकीकरण में जो योगदान दिया वह अद्वितीय और आज के दौर में प्रेरणादायक है. उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देश की 562 रियासतों को एक सूत्र में बांधकर एक राष्ट्र,एक संविधान,एक राष्ट्रीय ध्वज का सपना साकार किया. उन्होंने न केवल देश की सीमाओं को जोड़ा, बल्कि भारतीय जनमानस को भी एकता के सूत्र में बांधने का साहसिक कार्य किया. प्रो.चौधरी ने कहा कि पटेल की लौह इच्छाशक्ति, व्यावहारिक दृष्टिकोण और राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना ने भारत को लोकतंत्र की मज़बूत दिशा प्रदान की. कार्यक्रम का संचालन कर रहे योगा क्लब कॉर्डिनेटर डॉ.राजेश कुमार चंदेल ने कहा कि आज के समय में सरदार वल्लभभाई पटेल के उस दृष्टिकोण को आत्मसात करने की आवश्यकता है. जिसके माध्यम से उन्होनें देश की एकता और अखंडता की रक्षा की. आयोजन के दूसरे चरण में रन फॉर यूनिटी के माध्यम से सर्वोच्च नागरिक अधिकार के रूप अपने मताधिकार का सुनिश्चित उपयोग आगामी विधान सभा चुनाव में करने के लिए युवाओं को विशेष रूप से प्रेरित किया गया. वहीं महाविद्यालय के योग प्रशिक्षक पवन कुमार चौधरी ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत की विविधता को उसकी शक्ति माना और लोगों से कहा कि पहले भारतीय, फिर कुछ और बनने की भावना अपनाने ही अपना देश मजबूत बनेगा.सरदार पटेल का जीवन हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र की सेवा केवल विचारों से नहीं, बल्कि कर्म से होती है.योग के माध्यम से भी व्यक्ति में एकता, संतुलन और आत्मबल की भावना विकसित होती है, जो राष्ट्रनिर्माण की मूलभूत शर्त है. कार्यक्रम को डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, डॉ. योगेंद्र सम्यक, डॉ.प्रेम कुमार,डॉ.विकास कुमार,डॉ. मेनका, डॉ.जितेश कुमार, डॉ. प्रदीप प्रसाद ने संबोधित किया. संगोष्ठी में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, विद्यार्थी एवं योग क्लब के सदस्य यथा दिवाकर कुमार, अखिलेश कुमार,अविनाश, स्तुति कुमारी, कृति कुमारी, सिंपल कुमारी, अन्नपूर्णा, डिंपल, किशन,राहुल, रजनीश, जितेश,रिशु आदि की भागीदारी रही.

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Author: SATISH KUMAR

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