23 साल में बने असिस्टेंट प्रोफेसर, अब डॉ. प्रशांत को मिलेगा हिमाचल प्रदेश राज्य शिक्षक सम्मान

पश्चिमी चंपारण के डॉ. प्रशांत रमण रवि को 5 सितंबर को हिमाचल प्रदेश राज्य शिक्षक सम्मान से नवाजा जाएगा. 23 साल की उम्र में सहायक प्रोफेसर बने डॉ. प्रशांत के शैक्षणिक यूट्यूब वीडियो को एक करोड़ से अधिक व्यूज मिल चुके हैं.

बगहा का गौरव: पश्चिमी चंपारण के पतिलार निवासी और राजकीय महाविद्यालय चंबा के युवा प्राध्यापक डॉ. प्रशांत रमण रवि को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस वर्ष का हिमाचल प्रदेश राज्य शिक्षक सम्मान (कॉलेज कैडर) दिया जाएगा. शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को राजभवन, शिमला में आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा. डॉ. प्रशांत को शिक्षण में नवाचार, डिजिटल माध्यमों के प्रभावी इस्तेमाल और हिंदी को विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए यह सम्मान मिल रहा है.

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23 साल की उम्र में बने थे सहायक प्रोफेसर

डॉ. प्रशांत रमण रवि की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर सहायक प्रोफेसर के रूप में करियर शुरू किया था. पिछले करीब नौ वर्षों से वह चंबा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

अब राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित होकर उन्होंने पश्चिमी चंपारण का नाम भी गौरवान्वित किया है. उन्हें यह सम्मान पाने वाले सबसे युवा अध्यापकों में शामिल होने का गौरव मिला है.

यूट्यूब पर बनाए 500 शैक्षणिक वीडियो

डॉ. प्रशांत ने पारंपरिक शिक्षण के साथ डिजिटल माध्यम को भी पढ़ाई का प्रभावी जरिया बनाया. उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से पाठ्यक्रम आधारित करीब 500 शैक्षणिक वीडियो तैयार किए हैं.

इन वीडियो को अब तक 10 मिलियन यानी एक करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है. उनके इस प्रयास से विद्यार्थियों को कक्षा के बाहर भी पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री आसानी से उपलब्ध हो रही है. हिंदी विषय को सरल और रुचिकर तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाने में भी उनके डिजिटल कंटेंट की भूमिका रही है.

विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर सीखने का मौका

डॉ. प्रशांत केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं. वह विद्यार्थियों को साहित्य, शिक्षा, प्रशासन, कला और संस्कृति से जुड़े लोगों के साथ संवाद का अवसर भी उपलब्ध कराते हैं.

जिला प्रशासन चंबा के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर के साहित्य उत्सव और पुस्तक मेले के आयोजन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी ‘युवा संवाद श्रृंखला’ के माध्यम से विद्यार्थियों को अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और व्यक्तित्वों से सीधे बातचीत करने का अवसर मिलता है.

पांच किताबें और 20 से अधिक शोध आलेख

शिक्षण और अकादमिक गतिविधियों के साथ डॉ. प्रशांत का लेखन और शोध के क्षेत्र में भी योगदान रहा है. उनकी अब तक पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. इसके अलावा 20 से अधिक शोध आलेख प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं.

शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें विष्णु प्रभाकर राष्ट्रीय सम्मान 2026 भी मिल चुका है. अब हिमाचल प्रदेश का राज्य शिक्षक सम्मान उनके खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ने जा रहा है.

पतिलार के पूर्व छात्र हैं डॉ. प्रशांत

डॉ. प्रशांत सरस्वती विद्या मंदिर पतिलार के पूर्ववर्ती छात्र रहे हैं. जिस क्षेत्र से उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की, वहीं से निकलकर शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना स्थानीय लोगों के लिए भी गर्व की बात है.

5 सितंबर को राजभवन, शिमला में सम्मानित किए जाने के बाद उनकी उपलब्धि को लेकर पश्चिमी चंपारण में भी खुशी का माहौल है.

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By Israel ansari

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