Bettiah News: रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता के बीच पश्चिम चंपारण के किसानों तक जैविक खाद पहुंचाने की बड़ी तैयारी शुरू हुई है. कुमारबाग स्थित वर्द्ध्न बायोगैस प्लांट में प्रतिदिन करीब 30 टन जैविक खाद का उत्पादन हो रहा है. अब इसे पैक्स के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की योजना है.
प्लांट प्रबंधन के अनुसार, जैविक खाद को 50 किलोग्राम की बोरियों में पैक किया जाएगा. इसे पैक्स को 150 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके बाद किसानों के बीच निर्धारित मूल्य पर वितरण किया जाएगा.
ठोस के साथ तरल जैविक खाद भी हो रही तैयार
प्लांट के निदेशक अनंत कुमार ने बताया कि यहां ठोस जैविक खाद के साथ तरल जैविक खाद का भी उत्पादन किया जा रहा है. किसानों के बीच इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी तैयारी है.
इस पहल का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद उपलब्ध कराने के साथ रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता कम करना है.
मिट्टी की सेहत सुधारने में कैसे मिलेगी मदद?
जानकारों के अनुसार, जैविक खाद का नियमित इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरा शक्ति और मृदा स्वास्थ्य को बेहतर करने में मदद करता है. इससे फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलने के साथ उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
जानकारों का दावा है कि जैविक खाद के एक बार किए गए प्रयोग का सकारात्मक असर मिट्टी में करीब तीन वर्षों तक देखा जा सकता है. इसके इस्तेमाल को पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक खेती की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
जिले में तीन और बायोगैस प्लांट लगाने की तैयारी
कुमारबाग के अलावा पश्चिम चंपारण में तीन नए बायोगैस प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. इन परियोजनाओं के लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है और संबंधित कंपनियों ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.
सभी प्रस्तावित प्लांट चालू होने के बाद जिले में प्रतिदिन करीब 31 टन बायोगैस और 160 टन जैविक खाद का उत्पादन होने का अनुमान है.
किसानों तक निर्धारित दर पर पहुंचेगी खाद
जिला उद्योग केंद्र, पश्चिम चंपारण के महाप्रबंधक रोहित राज के अनुसार, सभी प्लांटों से उत्पादित जैविक खाद किसानों को निर्धारित दर पर उपलब्ध कराई जाएगी.
फिलहाल कुमारबाग प्लांट में तैयार हो रही जैविक खाद को पैक्स के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की तैयारी है. वहीं, तीन नए प्लांट शुरू होने के बाद जिले में जैविक खाद की उपलब्धता और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिल सकता है.
