Bihar Rail Project: उत्तर-पूर्व हिस्से से दिल्ली और मुंबई की रेल यात्रा आने वाले वर्षों में कहीं अधिक आसान और तेज होने वाली है. भारतीय रेलवे द्वारा वाल्मीकिनगर-गोरखपुर रेल रूट को मजबूत करने और घुघली से आनंद नगर तक नई रेल लाइन बिछाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. इस नई व्यवस्था से जहां गोरखपुर जंक्शन पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, वहीं मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा, समस्तीपुर, मोतिहारी, सहरसा, बरौनी, पटना जैसे शहरों से बेतिया और नरकटियागंज होकर दिल्ली व मुंबई जाने वाली ट्रेनों को एक वैकल्पिक और सुगम मार्ग मिलेगा.वर्तमान में बिहार के शहरों से नरकटियागंज के रास्ते दिल्ली-मुंबई की ओर जाने वाली अधिकांश ट्रेनें गोरखपुर जंक्शन पर निर्भर हैं. गोरखपुर देश के सबसे व्यस्त जंक्शनों में शामिल है, जहां हर दिन सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं.इसी दबाव को कम करने के लिए रेलवे ने घुघली-आनंद नगर नई रेल लाइन को मंजूरी दी है.
1000 करोड़ का प्रोजेक्ट: दिल्ली-मुंबई की यात्रा में होगी भारी समय की बचत
इस नई रेल लाइन की लंबाई करीब 52 से 53 किलोमीटर है, जिसका कार्य शुरू हो गया है. इस परियोजना पर लगभग 950 से 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. रेलवे का लक्ष्य है कि 2027 तक इस लाइन को चालू कर दिया जाए.लाइन चालू होते ही वाल्मीकिनगर-गोरखपुर रूट पर घुघली एक नए जंक्शन के रूप में उभरेगा और यहां से ट्रेनें सीधे आनंद नगर होते हुए निकल सकेंगी. इसका सीधा लाभ यह होगा कि बिहार से आने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनें गोरखपुर जंक्शन में प्रवेश किए बिना आगे बढ़ेंगी, जिससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी.रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस नई व्यवस्था से मुजफ्फरपुर से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों की दूरी में करीब 100 किलोमीटर तक की कटौती संभव है. इससे दिल्ली पहुंचने में 3 से 4 घंटे और मुंबई रूट पर करीब 6 से 7 घंटे तक के समय की बचत होगी.
रेल नेटवर्क से जुड़ेगा महाराजगंज, दोहरीकरण से परिचालन क्षमता में होगी वृद्धि
वाल्मीकिनगर-गोरखपुर रूट पर इस नई रेल लाइन के बनने से उत्तरप्रदेश का महाराजगंज जिला पहली बार सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ेगा. इससे बिहार में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व और नेपाल बॉर्डर तक पहुंच भी पहले से अधिक आसान हो जाएगी. इसके अलावा, वाल्मीकिनगर-गोरखपुर रेल रूट पर दोहरीकरण का काम भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है. लगभग 96 किलोमीटर लंबे इस रूट पर डबल लाइन का काम पूरा होने के बाद ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे परिचालन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी.
