पश्चिम चंपारण: विश्व स्तर पर उन्नत गन्ना उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाले देश मॉरीशस की तर्ज पर अब नरकटियागंज और आसपास के तराई इलाकों में गन्ने की सहफसली (इंटरक्रॉपिंग) खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा. स्थानीय न्यू स्वदेशी शुगर मिल की ओर से मंगलवार को गौनाहा प्रखंड अंतर्गत जम्हौली फार्म में एक दिवसीय विशेष कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. गन्ना प्रौद्योगिकी विस्तार कार्यक्रम के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र के करीब 200 किसानों ने भाग लिया, जहां उन्हें गन्ने के साथ दलहन, तिलहन एवं हरी सब्जियों की उन्नत खेती करने के व्यावहारिक तौर-तरीके सिखाए गए.
चार फीट की दूरी पर बुवाई कर लें दोहरी फसल: रविन्द्र कुमार तिवारी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष रविन्द्र कुमार तिवारी ने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि किसान यदि चार-चार फीट की दूरी पर गन्ने की कतारबद्ध बुवाई करें, तो दोनों कतारों के बीच की खाली जमीन में आसानी से आलू, सरसों, लाही, चना, मटर और बाकला जैसी फसलों की इंटरक्रॉपिंग की जा सकती है. इससे एक ही भूखंड से किसानों को मुख्य फसल गन्ने के साथ-साथ अल्पकालिक फसलों से भी अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी. उन्होंने उच्च उत्पादन और रोग नियंत्रण के लिए प्रमाणित स्वस्थ गन्ना बीज के चयन तथा बुवाई से पूर्व अनिवार्य बीज उपचार पर विशेष बल दिया.
मशीनीकरण और टिश्यू कल्चर नर्सरी तकनीक की दी जानकारी
समारोह में कार्यपालक उपाध्यक्ष राजीव कुमार त्यागी ने आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के फायदे गिनाए. उन्होंने किसानों को खेतों की गहरी जुताई करने, ऑटोमेटिक केन प्लांटर से कतारबद्ध बुवाई करने और आधुनिक गन्ना कटाई मशीनों के प्रयोग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि टिश्यू कल्चर विधि से तैयार किए गए उन्नत पौधों के माध्यम से किसान अपने ही खेतों में रोगमुक्त गन्ना बीज नर्सरी तैयार कर सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और प्रति एकड़ उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
प्रगतिशील व छोटे किसान रहे मौजूद, अधिकारियों ने बढ़ाया हौसला
इस तकनीकी गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों की शंकाओं का समाधान किया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से गन्ना महाप्रबंधक केएस ढाका, गन्ना उपप्रबंधक प्रेम सिंह, कृषि वैज्ञानिक डॉ. भूषण सिंह, सीएसएम सत्येन्द्र कुमार राय तथा गन्ना प्रसार पदाधिकारी बेतिया आजाद अहमद उपस्थित रहे. इस दौरान आसपास के गांवों से आए दर्जनों प्रगतिशील किसानों के साथ-साथ छोटे और सीमांत किसानों ने भी आधुनिक तकनीक अपनाकर सहफसली खेती करने का संकल्प दोहराया.
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