Monsoon Sugarcane Planting: पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में गन्ने की खेती अब अपने पारंपरिक दायरे से बाहर निकलने जा रही है. अब तक किसान केवल अक्टूबर और फरवरी के महीनों में ही गन्ने की बुआई करते थे. लेकिन नरकटियागंज चीनी मिल ने इस पुरानी परंपरा को बदलते हुए बिहार में पहली बार बड़े पैमाने पर 'मानसून प्लाटिंग' (वर्षाकालीन गन्ना रोपनी) की अनूठी शुरुआत करने का निर्णय लिया है. इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत थरुहट क्षेत्र के जंगल से सटे रेतीले. असिंचित और ऊंचे इलाकों से होगी. जहां वर्षों से खाली पड़ी बंजर जमीन अब स्थानीय किसानों के लिए बंपर कमाई का नया जरिया बनेगी. पहले चरण में 50 प्रगतिशील किसानों को रोगमुक्त उन्नत गन्ना बीज उपलब्ध कराया गया है. जबकि 125 किसान प्लाटिंग के लिए अपना इंडेंट दे चुके हैं. एक अगस्त से इसकी विधिवत रोपनी शुरू होने की पूरी संभावना है.
रेतीली और ऊपरी जमीन के लिए बेहतर विकल्प, चीनी मिल अपने फार्म से दे रही रोगमुक्त बीज
गौनाहा प्रखंड के बेलसंडी पंचायत स्थित मितनी गांव में आयोजित एक विशेष किसान गोष्ठी में नरकटियागंज चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष रविन्द्र कुमार तिवारी ने किसानों से इस मानसून प्लाटिंग तकनीक को अपनाने की जोरदार अपील की. उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों की रेतीली एवं ऊपरी जमीन पर पानी की कमी के कारण दूसरी फसलें नहीं हो पाती हैं. वहां गन्ना किसानों के लिए सबसे बेहतर और मुनाफेदार विकल्प साबित होगा. इससे न सिर्फ गन्ने की खेती का रकबा बढ़ेगा. बल्कि किसानों की वार्षिक आय में भी भारी वृद्धि होगी. उन्होंने बताया कि मानसून प्लाटिंग को बढ़ावा देने के लिए चीनी मिल अपने निजी रिसर्च फार्म से किसानों को पूरी तरह रोगमुक्त गन्ना बीज उपलब्ध करा रही है.
ढैंचा की हरी खाद से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति
इस नई तकनीक के तहत गन्ने की दो कतारों के बीच ढैंचा की बुवाई अंतर्वर्ती हरी खाद के रूप में कराई जाएगी. जिससे मिट्टी में प्रचुर मात्रा में जैविक तत्व बढ़ेंगे और खेतों की उर्वरा शक्ति में बड़ा सुधार होगा. मिल प्रबंधन द्वारा ढैंचा बीज का वितरण पहले ही किया जा चुका है. और किसानों के खेतों की तैयारी अब अंतिम चरण में है.
जमुनिया और गौनाहा क्षेत्र के नदी किनारे की जमीन चयनित
चीनी मिल प्रबंधन के अनुसार जमुनिया. भवानीपुर. सिंहासिनी और गौनाहा क्षेत्र के नदी किनारे स्थित रेतीले इलाकों का विशेष चयन इसलिए किया गया है. क्योंकि यहां जलभराव (वॉटरलॉगिंग) नहीं होता है और वर्षा ऋतु के मौसम में गन्ने का जमाव व पौधों की बढ़वार बेहद शानदार रहती है. इस अभियान को सफल बनाने के लिए मिल के अधिकारी गांव-गांव संपर्क अभियान चलाकर किसानों को इस नई कृषि तकनीक से जोड़ रहे हैं.
