मंगुराहा वन क्षेत्र बनेगा पर्यटकों का नया हॉटस्पॉट, बदला नजारा

नए साल को लेकर हर कोई खासा उत्साहित है. नये साल में केवल पांच दिन बचा हुआ है.

हरनाटांड़. नए साल को लेकर हर कोई खासा उत्साहित है. नये साल में केवल पांच दिन बचा हुआ है. कोई पार्टी का प्लान बना रहा है तो कोई परिवार और दोस्तों के साथ किसी शांत व खूबसूरत पर्यटन स्थल पर समय बिताने की सोच रहा है. अगर आप भी नए साल पर कुछ अलग, सुकून भरा और बजट फ्रेंडली पर्यटन स्थल की तलाश में हैं तो बिहार के पश्चिम के इकलौता वीटीआर आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. वीटीआर के वाल्मीकिनगर और मंगुराहा वन क्षेत्र के पर्यटन स्थल आपको प्रकृति के बेहद करीब ले जाएंगे. यहां की हरी-भरी वादियां, घने जंगलों में चहचहाते पक्षी, शांत वातावरण और मनोरम दृश्य पर्यटकों को खासा आकर्षित करती आ रही है तथा कर रहे हैं. प्राकृतिक सौंदर्य के बीच पर्यटक यादगार तस्वीरें खींचते नजर आ रहे हैं. भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है. ठंड के मौसम में त्रिवेणी संगम तट पर बहता हरा पानी, दूर-दूर तक फैले पहाड़ और सूरज की किरणों की अद्भुत छटा मन को सुकून पहुंचाती है. यहां पहुंचते ही लोगों को असीम शांति की अनुभूति होती है. बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ माता रानी की पूजा-अर्चना कर नए वर्ष की शुरुआत कर रहे हैं. वैसे तो साल भर वीटीआर में पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नववर्ष के मौके पर यहां विशेष रौनक देखने को मिलती है. पर्यटन सर्किट से जोड़ा गया है प्रसिद्ध सोफा मंदिर वीटीआर वन प्रमंडल एक के मंगुराहा वन क्षेत्र को नया और आकर्षक रूप दिया गया है. पर्यटकों को अब पहले से अधिक लंबी दूरी की जंगल सफारी, वन्यजीवों और दुर्लभ पक्षियों के दीदार का रोमांचक अवसर मिल रहा है. जंगल सफारी के साथ-साथ पर्यटकों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराने के लिए प्रसिद्ध सोफा मंदिर को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ा गया है. घने जंगलों के बीच स्थित यह धार्मिक स्थल पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा. मंगुराहा का पूर्वी प्रवेश द्वार है, जो अपने समृद्ध वन्यजीवों, विस्तृत और मनमोहक घास के मैदानों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है. प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर मंगुराहा क्षेत्र पर्यटकों को जंगल के असली अनुभव से रूबरू कराता है. सूर्यास्त स्थल के लिए भी प्रसिद्ध है लाल भीतिया मंगुराहा अपने लाल भीतिया सूर्यास्त स्थल के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां से तीन मंजिला ऊंचाई तक फैले घने साल के जंगलों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है, जो सूर्यास्त के समय और भी मनोरम हो उठता है. प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थल किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां आने वाले सैलानियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहाड़ के आसपास बांस से निर्मित अतिरिक्त बैठने के सोफे लगाए जाएंगे, ताकि पर्यटक प्राकृतिक नजारों का आनंद आराम से ले सकें. इतिहास और आस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है मंगुराहा इतिहास और आस्था की दृष्टि से भी मंगुराहा क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है. यहां स्थित भितिहरवा गांधी आश्रम और रामपुरवा अशोक स्तंभ भारत के स्वतंत्रता संग्राम और प्राचीन इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं.इसके अलावा क्षेत्र में स्थित सोफा मंदिर, सहोदरा मंदिर, लाल मिथिया (सूर्यास्त बिंदु) सुभद्रा मंदिर स्मारिका दुकान,पांडाई नदी जैसे धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. प्रकृति, इतिहास और अध्यात्म का अनूठा संगम मंगुराहा को वीटीआर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनाता है. सुविधाओं का बेहतर ख्याल रहा है वीटीआर नव वर्ष के अवसर पर मंगुराहा वन प्रक्षेत्र में पर्यटकों के लिए रोमांचक वन्यजीवों के दीदार के साथ-साथ नए आकर्षण जोड़े गए हैं. जिसमें अब साइकिलिंग का विकल्प भी शामिल हो सकता है. जिससे पर्यटक प्रकृति के करीब साइकिल चलाकर वन्य जीवन का अनुभव कर सके. अन्य राज्यों से आए एक पर्यटक ने बताया कि वीटीआर प्रशासन द्वारा पर्यटकों की सुविधाओं का बेहतर ख्याल रखा जा रहा है, जो प्रशंसनीय है. बोले वन संरक्षक इस संबंध में वीटीआर के वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक डॉ. नेशामणि के ने बताया कि बड़ी संख्या में पर्यटक वीटीआर पहुंच रहे हैं और नए साल का स्वागत सूरज की पहली किरणों, पक्षियों के चहचहाने और प्रकृति की अनूठी छटा के बीच करें. वीटीआर पूरी तरह तैयार है. यहां झूला पुल, इको पार्क, गंडक नदी में राफ्टिंग जैसे आकर्षण पर्यटकों को खासा लुभा रहे हैं. वन प्रशासन उनकी सुविधाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क है.

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Author: SATISH KUMAR

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