Bettiah News: पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज प्रखंड की रोआरी पंचायत से इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करने वाली एक घटना सामने आई है. सड़क हादसे में घायल एक नंदी को बचाने के लिए ग्रामीणों ने चार-पांच दिनों तक हरसंभव प्रयास किए, लेकिन समय पर पशु चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई. इसके बाद ग्रामीणों ने पूरे सम्मान के साथ नंदी का अंतिम संस्कार किया. इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों की पशु स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बाइक की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हुआ था नंदी
जानकारी के अनुसार, चार से पांच दिन पहले एक बाइक की टक्कर से नंदी गंभीर रूप से घायल हो गया था. वह अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो पा रहा था और सड़क किनारे तड़प रहा था. इसी दौरान केहुनिया-रोआरी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि राजू वर्मा ने उसे करीब दो किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.
ग्रामीणों ने दिन-रात की सेवा, लेकिन नहीं पहुंची मेडिकल टीम
राजू वर्मा और ग्रामीणों ने मिलकर नंदी के घावों की डिटॉल से सफाई की, पट्टी की और रोजाना चारा, रोटी व अन्य भोजन की व्यवस्था की. आसपास से गुजरने वाले लोग भी उसके लिए घास और चारा लेकर पहुंचते रहे. सभी की कोशिश थी कि किसी तरह उसकी जान बच जाए.
आश्वासन मिला, लेकिन नहीं पहुंची एंबुलेंस और डॉक्टर
मुखिया प्रतिनिधि राजू वर्मा ने बताया कि उन्होंने मामले की जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को दी थी. बीडीओ कार्यालय से एक नंबर उपलब्ध कराया गया, जहां संपर्क करने पर दो से तीन घंटे में पशु चिकित्सक भेजने और जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस से इलाज के लिए भेजने का आश्वासन मिला.
ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद न तो पशु चिकित्सक पहुंचे और न ही एंबुलेंस आई. इलाज के अभाव में घायल नंदी ने दम तोड़ दिया.
सम्मान के साथ किया अंतिम संस्कार
नंदी की मौत के बाद ग्रामीणों ने गड्ढा खोदकर नमक डालते हुए पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया. इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे. लोगों का कहना है कि यदि समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो शायद नंदी की जान बचाई जा सकती थी.
बीडीओ ने कही कार्रवाई की बात
प्रखंड विकास पदाधिकारी सूरज कुमार सिंह ने बताया कि मामले में प्रखंड पशुपालन विभाग के पदाधिकारी को पहले ही निर्देश दिया गया था. निर्देश के बावजूद कोई पहल नहीं की गई. उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित पशु चिकित्सक और कर्मियों से शोकॉज (कारण बताओ नोटिस) पूछा जा रहा है.
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