Bettiah: महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में बुधवार को ‘इमरजिंग न्यू ट्रेंड्स ऑफ इंडियन डेमोक्रेसी’ अर्थात ‘भारतीय लोकतंत्र में उभरती नई प्रवृत्तियां’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई. प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नवल किशोर बैठा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय लोकतंत्र के बदलते स्वरूप और उसकी नई चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया गया.
लोकतंत्र की ताकत नागरिक सहभागिता में
प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नवल किशोर बैठा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की असली ताकत उसकी विविधता, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक सहभागिता में निहित है. बदलते सामाजिक-आर्थिक परिवेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना और युवाओं में संवैधानिक चेतना विकसित करना उच्च शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. लोकतंत्र को केवल चुनाव और सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि इसकी सार्थकता सक्रिय नागरिक भागीदारी और जवाबदेह संस्थाओं से तय होती है.
डिजिटल राजनीति ने दिए लोकतंत्र को नए आयाम
आयोजन समिति के सचिव सह पीजी राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप प्रसाद ने कहा कि चुनावी व्यवहार से लेकर राजनीतिक संचार तक में आए बदलावों ने लोकतंत्र को नए आयाम दिए हैं. मुख्य वक्ता डॉ. पंकज कुमार सिंह ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और संस्थागत जवाबदेही को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया. डॉ. गौतम कुमार ने डिजिटल राजनीति, युवा-महिला भागीदारी और पहचान आधारित विमर्श को नई लोकतांत्रिक प्रवृत्तियों के रूप में रेखांकित किया.
सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ किया गया. संगोष्ठी का संचालन विद्वान प्राध्यापक डॉ. बिपिन कुमार दुबे ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किशोरी लाल राम और डॉ. पूजा कुमारी ने संयुक्त रूप से किया. संगोष्ठी में प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही
