बगहा: पीतल की चाबी ने खोला अधजले शव का राज, पत्नी की हत्या में पति को उम्रकैद

पत्नी रीना देवी की हत्या कर शव को अधजली अवस्था में फेंकने के मामले में पति सुभाष यादव को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ की अदालत ने दोषी करार दिया है. अदालत ने सुभाष यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में बेटे का बयान महत्वपूर्ण साबित हुआ.

Bagaha News: बगहा. पत्नी रीना देवी की हत्या कर शव को क्षत-विक्षत और अधजली अवस्था में फेंकने के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने पति सुभाष यादव को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने हत्या के मामले में एक लाख रुपये और साक्ष्य मिटाने के मामले में 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.

Bagaha News: पत्नी की हत्या के मामले में पति दोषी

मामला धनहा थाना कांड संख्या 182/20 से जुड़ा है. अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि मृतका की मां इंदु देवी की प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी. आरोप था कि सुभाष यादव ने अपनी पत्नी रीना देवी की हत्या कर उसके हाथ, पैर और गला काटकर अलग कर दिया.

अधजली हालत में फेंका गया था शव

आरोप के अनुसार हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को क्षत-विक्षत और अधजली अवस्था में फेंक दिया गया था. पुलिस ने जांच के दौरान शव बरामद किया, लेकिन उसकी स्थिति इतनी खराब थी कि पहचान करना मुश्किल था.

बाद में मृतका के गले में हमेशा रहने वाली पीतल की चाबी के आधार पर शव की पहचान रीना देवी के रूप में की गई.

साक्ष्य मिटाने के मामले में 7 साल की सजा

सुनवाई के दौरान उपलब्ध गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुभाष यादव को हत्या के साथ साक्ष्य मिटाने का भी दोषी माना. भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत उसे सात वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई.

अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर दोनों मामलों में छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

बेटे का बयान भी बना महत्वपूर्ण तथ्य

मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के पुत्र द्वारा अपनी नानी इंदु देवी से कही गई बात को भी महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में देखा गया. बेटे ने बताया था कि "पापा ने मम्मी को मार दिया." अभियोजन पक्ष ने इसे मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों में शामिल किया.

गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला

पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद आरोपी पति के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों का अदालत ने अवलोकन किया. इसके बाद सुभाष यादव को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई.

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By Israel ansari

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