Teacher's day special: सरकारी स्कूलों को लेकर आम धारणा भले ही सिर्फ किताब-कॉपी और पाठ्यक्रम तक सीमित हो, लेकिन पश्चिम चंपारण के बैरिया का एक प्राथमिक विद्यालय इस सोच को बदलने की कोशिश कर रहा है. यहां बच्चे पढ़ाई के साथ संस्कार, संस्कृति, भाषा और संगीत भी सीख रहे हैं. कक्षा में कभी संस्कृत के संवाद सुनाई देते हैं तो कभी भोजपुरी के पारंपरिक गीतों की मधुर आवाज गूंजती है.
शिक्षक प्रशांत सौरभ की अनूठी पहल
यह कहानी है राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुर बड़ा, बैरिया की. विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज देवनाथ हैं, जबकि शिक्षक प्रशांत सौरभ ने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण को अपनी पहल का हिस्सा बनाया है. उनके प्रयास से चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चे संस्कृत में संभाषण करना सीख रहे हैं. अब बच्चों को भोजपुरी के पारंपरिक बालगीत और लोकधुन भी सिखाई जा रही है. इनमें चर्चित भोजपुरी लोरी सोने के कटोरिया में दूध-भात, गोदिया कन्हैया पूत हो भी शामिल है. यह गीत भोजपुरी लोक परंपरा की लोकप्रिय लोरियों में शुमार है.
पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व निर्माण पर जोर
शिक्षक प्रशांत सौरभ का मानना है कि विद्यालय केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की कार्यशाला होना चाहिए. उनका कहना है कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उससे बच्चों में संस्कार, अच्छा चरित्र, रचनात्मकता और समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो. इसी सोच के साथ उन्होंने विद्यालय में संस्कृत और संगीत को विशेष स्थान दिया है. उनके अनुसार संस्कृत बच्चों में संस्कार और नैतिकता के विकास में मदद करती है, जबकि संगीत उनकी रचनात्मकता को बढ़ाता है.
62 बच्चों का नामांकन, निजी स्कूलों से भी लौटे बच्चे
इस छोटे से प्राथमिक विद्यालय की एक और खास उपलब्धि है नामांकन. शिक्षक के अनुसार इस वर्ष विद्यालय में 62 बच्चों का नामांकन हुआ है. विद्यालय दो वार्डों के बीच स्थित है और इसका पोषक क्षेत्र भी बहुत बड़ा नहीं है. इसके बावजूद दर्जन से अधिक बच्चे निजी स्कूलों से नाम कटाकर यहां दाखिला लेने पहुंचे हैं. शिक्षक इसे विद्यालय के प्रति अभिभावकों के बढ़ते भरोसे के रूप में देखते हैं. उनका अभियान है मेरा विद्यालय, मेरा तीर्थ’. इसी संकल्प के साथ बच्चों को बेहतर बनाने की कोशिश जारी है.
बिहार के शिक्षा मंत्री ने भी की तारीफ
शिक्षक प्रशांत सौरभ के इस पहल की चर्चा बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी तक भी पहुंची है. मंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में विद्यालय के बच्चों की वीडियो साझा करते हुए लिखा कि बिहार के विद्यालयों में भारतीय ज्ञान पद्धति का विकास हो रहा है. उन्होंने बच्चों के संस्कृत संभाषण का उल्लेख करते हुए लिखा कि अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों के गांव के बच्चे जब संस्कृत में परिचय देते हैं, तो लगता है कि एक शिक्षक अपनी मेहनत से पूरे गांव का सौभाग्य बदल रहा है.
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