बाढ़ की चपेट में गांव

बेतिया के नवलपुर में बाढ़ के दो माह बाद भी राहत नहीं, नाव के सहारे जिंदगी जी रहे ग्रामीण

पश्चिम चंपारण के नवलपुर में बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण दो महीने बाद भी राहत का इंतजार कर रहे हैं. फसल क्षति, वित्तीय सहायता और आवश्यक राहत सामग्री न मिलने से लोगों में आक्रोश है. नाव के सहारे जरूरी काम निपटाने को मजबूर ग्रामीण, पशुपालक भी चारे की कमी से जूझ रहे हैं.

West Champaran News: नवलपुर. ग्राम पंचायत राज खुटवानिया जरलपुर के वार्ड संख्या 11 से 17 तक के कई गांव और टोले इस वर्ष बाढ़ से प्रभावित हैं. जरलपुर, शाही बाजार, चमारटोली, बैसिया और गजना समेत कई इलाकों में ग्रामीणों की परेशानी अब भी बनी हुई है. ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ के करीब दो माह बाद भी फसल क्षति, वित्तीय सहायता और राहत राशि का लाभ नहीं मिला है. इससे लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है.

दो महीने बाद भी फसल क्षति का नहीं मिला लाभ

ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ के दौरान पंचायत के अधिकांश हिस्सों में खेत जलमग्न हो गये थे. धान, गन्ना समेत अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ. बाढ़ का पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है.

ग्रामीणों का कहना है कि फसल क्षति के बाद अब तक मुआवजा या वित्तीय सहायता नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है.

नाव के सहारे जरूरी काम करने को मजबूर

पानी से घिरे इलाकों में आवागमन के लिए नाव ही मुख्य सहारा बनी हुई है. ग्रामीणों को जरूरी सामान खरीदने, बाजार जाने और इलाज कराने के लिए भी नाव से आने-जाने को मजबूर होना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों के अनुसार, सामान्य आवागमन प्रभावित होने से रोजमर्रा की जिंदगी काफी कठिन हो गयी है. खासकर बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

पशुपालकों के सामने चारे का संकट

बाढ़ के कारण पशुपालकों की मुश्किल भी कम नहीं हुई है. खेत और आसपास के इलाके पानी में डूबे होने से हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.

ग्रामीणों का कहना है कि चारे की कमी के कारण पशुओं को खिलाने में परेशानी हो रही है. लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने से पशुपालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.

तिरपाल के अलावा पर्याप्त राहत नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन की ओर से मुख्य रूप से तिरपाल उपलब्ध कराया गया है. लोगों का कहना है कि बाढ़ से हुए नुकसान की तुलना में यह सहायता पर्याप्त नहीं है.

फसल नुकसान, आवागमन की समस्या और पशुओं के चारे की कमी के बीच ग्रामीणों को तत्काल वित्तीय सहायता और राहत सामग्री की जरूरत है.

पिछड़े क्षेत्र में बाढ़ ने बढ़ाया आर्थिक संकट

मुखिया पति अबुलैश अंसारी ने कहा कि पंचायत पहले से पिछड़ा क्षेत्र है और यहां खेती तथा मजदूरी ही लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है. फसल बर्बाद होने के बाद ग्रामीणों के सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है.

उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन से जल्द राहत और सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता बतायी.

ग्रामीणों ने तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग की

वार्ड सदस्य और बाढ़पीड़ित कृष्णा शर्मा, लुटावन चौधरी, अशर्फी मुखिया, श्याम शर्मा, महंथ चौधरी, फिदा देवान और शोएब अख्तर समेत अन्य ग्रामीणों ने तत्काल सर्वे कराने की मांग की है.

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से हुए नुकसान का सही आकलन कर प्रभावित परिवारों को फसल क्षति का मुआवजा और वित्तीय सहायता दी जाए. लोगों ने प्रशासन से राहत कार्यों में तेजी लाने की भी मांग की है.

राहत नहीं मिली तो बढ़ सकती है नाराजगी

बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब भी आवागमन और आजीविका से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं. ग्रामीणों का कहना है कि समय पर सर्वे और सहायता नहीं मिली तो आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है.

फिलहाल प्रभावित परिवार प्रशासन से फसल क्षति के आकलन, मुआवजे और वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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