जंगल से भटककर रेलवे पुल पर पहुंचा दुर्लभ फिशिंग कैट, इलाज के बाद जंगल में छोड़ा

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से भटका एक दुर्लभ फिशिंग कैट बगहा-नरकटियागंज रेलखंड पर पाया गया. ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग ने रेस्क्यू कर लिया. घायल कैट का इलाज चल रहा है.

Bihar Tiger Reserve: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के जंगल से भटका एक दुर्लभ फिशिंग कैट मंगलवार की सुबह बगहा-नरकटियागंज रेलखंड पर पहुंच गया. बगहा और खैरपोखरा स्टेशन के बीच रेलवे पुल संख्या-349 पर वन्यजीव को देखकर ग्रामीणों में हलचल मच गई. दूर से देखने पर लोगों ने उसे तेंदुए का बच्चा समझ लिया. सूचना मिलते ही वन विभाग और रेलवे प्रशासन सक्रिय हुआ और काफी मशक्कत के बाद फिशिंग कैट को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया.

रेलवे ट्रैक पर वन्यजीव देख मचा हड़कंप

बगहा रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक संतोष पांडेय ने बताया कि तिरुपति शुगर मिल के समीप मध्य मुख्य तिरहुत नहर पर बने रेलवे पुल संख्या-349 पर रेलवे ट्रैक के बीच एक जानवर बैठा था. इसकी सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस ने वन विभाग को जानकारी दी.

वन्यजीव के रेलवे ट्रैक पर होने के कारण ट्रेनों को धीमी गति से चलाने और आवश्यकता पड़ने पर रोकने का निर्देश दिया गया. हालांकि, रेस्क्यू अभियान के बाद रेल परिचालन सामान्य कर दिया गया.

चारों तरफ से घेरकर बड़े जाल से किया रेस्क्यू

सूचना मिलते ही बगहा वन प्रक्षेत्र की टीम मौके पर पहुंची. वन विभाग और रेलवे पुलिस की टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में फिशिंग कैट को चारों तरफ से घेरा. काफी प्रयास के बाद उसे बड़े जाल की मदद से सुरक्षित पकड़ लिया गया.

बगहा वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालकर ने बताया कि फिशिंग कैट घायल अवस्था में मिला है. आशंका है कि किसी ट्रेन की चपेट में आने से उसकी कमर में चोट लगी है. चोट के कारण उसे चलने-फिरने में परेशानी हो रही थी. रेस्क्यू के बाद उसे वाहन से बगहा वन क्षेत्र परिसर लाया गया.

इलाज के बाद वीटीआर के जंगल में छोड़ा जाएगा

वन विभाग के अनुसार, फिशिंग कैट का इलाज पशु चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार की देखरेख में किया जा रहा है. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे दोबारा वीटीआर के जंगल में सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा.

दो सप्ताह से सरेह में घूम रहा था फिशिंग कैट

ग्रामीणों के अनुसार, वीटीआर से भटका यह फिशिंग कैट करीब दो सप्ताह से सेरहवा सरेह क्षेत्र में घूम रहा था. नरवल-बरवल गांव के सरेह में मजदूरों ने उसे कई बार देखा था. कभी वह गन्ने के खेतों में छिपा रहता तो कभी झाड़ियों में छोटे जीवों का शिकार करता था.

बारिश के कारण जंगल से बाहर निकल रहे वन्यजीव

लगातार बारिश और गंडक नदी के बढ़े जलस्तर से वीटीआर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है. ऐसे में वन्यजीव ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की तलाश में जंगल से बाहर निकल रहे हैं. वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वन्यजीव दिखने पर उसके पास न जाएं और तुरंत विभाग को सूचना दें.

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