BRABU Degree Second Semester Exam: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के प्रशासन की ओर से आयोजित स्नातक द्वितीय सेमेस्टर सत्र 2025-29 की परीक्षा के दूसरे दिन भी प्रश्नपत्र कम पड़ने की समस्या सामने आयी. जिला मुख्यालय के एमजेके कॉलेज और राम लखन सिंह यादव कॉलेज में विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निर्धारित परीक्षार्थियों की संख्या से कम पहुंचने के कारण कई विद्यार्थियों को फोटोकॉपी कराये गये प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर परीक्षा ली गयी. इससे परीक्षार्थियों में नाराजगी देखने को मिली.
कई विषयों के प्रश्नपत्र पड़े कम
बुधवार को प्रथम पाली में राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, भौतिकी, मार्केटिंग और मानव संसाधन प्रबंधन विषयों की परीक्षा हुई. वहीं दूसरी पाली में ग्रुप डी के तहत भूगोल, अर्थशास्त्र, गृह विज्ञान, अकाउंटिंग एंड फाइनेंस, वनस्पति विज्ञान, दर्शनशास्त्र और संगीत विषयों के परीक्षार्थी शामिल हुए.
दोनों पालियों में परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू करायी गयी. हालांकि, कुछ विषयों में प्रश्नपत्रों की संख्या कम होने के कारण कॉलेज प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी.
पांच से 25 तक प्रश्नपत्र कम पड़ने की बात
राम लखन सिंह यादव कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. अभय कुमार ने बताया कि परीक्षा के दूसरे दिन भी अलग-अलग विषयों में करीब पांच से 25 तक प्रश्नपत्र कम पड़ गये. तत्काल व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी कराकर परीक्षार्थियों को उपलब्ध करायी गयी.
कॉलेज के कई परीक्षक प्राध्यापकों के अनुसार, कुछ परीक्षार्थियों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जतायी. छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय को पूरी परीक्षा फीस देने के बाद फोटोकॉपी वाले प्रश्नपत्र से परीक्षा देना उचित नहीं है.
अतिरिक्त छात्रों के फॉर्म भरने से हुई कमी
प्राप्त जानकारी के अनुसार कॉलेज प्रशासन का कहना है कि प्रश्नपत्रों की संख्या पहले से निर्धारित परीक्षार्थियों के आधार पर भेजी गयी थी. बाद में अतिरिक्त विद्यार्थियों के परीक्षा फॉर्म भरने के कारण कुछ विषयों में प्रश्नपत्र कम पड़ गये.
दोनों महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने प्रश्नपत्रों की कमी की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को देने की बात कही है.
लगातार दूसरे दिन व्यवस्था पर उठे सवाल
परीक्षा के लगातार दूसरे दिन प्रश्नपत्र कम पड़ने की समस्या सामने आने से विश्वविद्यालय की प्रश्नपत्र आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. साथ ही परीक्षा से पहले कॉलेजों में वास्तविक परीक्षार्थियों की संख्या का सही मिलान नहीं किये जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
परीक्षार्थियों का कहना है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पर्याप्त संख्या में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है. ऐसे में फोटोकॉपी वाले प्रश्नपत्र से परीक्षा लेने की स्थिति दोबारा नहीं आनी चाहिए.
