बेतिया चमैनिया नदी पुल: योगपट्टी प्रखंड के बासोपट्टी पंचायत के मठिया रसूलपुर जाने वाले मार्ग पर चमैनिया नदी का पुल करीब तीन वर्षों से ध्वस्त है. बहुअरवा और बासोपट्टी पंचायतों को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण रास्ते पर लोग मजबूरी में जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं. पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से से बाइक, साइकिल और अन्य वाहनों के गुजरने के दौरान हर समय हादसे का खतरा बना रहता है. बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ परेशानी और बढ़ जाती है.
टूटा पुल बना लोगों की मजबूरी
चमैनिया नदी पर बने इस पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण रोजाना बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों के लिए यह रास्ता बाजार, स्कूल, अस्पताल और प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम है.
पुल की बदहाल स्थिति के बावजूद लोग इसी रास्ते से आने-जाने को मजबूर हैं. दोपहिया वाहन और साइकिल सवारों के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से से गुजरना खासा जोखिम भरा है. थोड़ी सी चूक होने पर नदी में गिरने या दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
बारिश में बढ़ जाता है हादसे का खतरा
बरसात के मौसम में चमैनिया नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पुल की स्थिति और गंभीर हो जाती है. पानी बढ़ने से क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास का रास्ता भी जोखिम भरा हो जाता है.
सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को होती है. जरूरी काम के लिए उन्हें भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार खतरे के बीच आवागमन करना उनकी मजबूरी बन चुका है.
अधिकारियों को जानकारी, फिर भी स्थायी समाधान नहीं
ग्रामीणों के अनुसार पुल की बदहाली की जानकारी लंबे समय से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को है. इसके बावजूद अब तक पुल की स्थायी मरम्मत या नए पुल के निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन गंभीर होगा, ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए. ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी तत्काल स्थल का निरीक्षण करें और समस्या का स्थायी समाधान कराएं.
नए पुल या स्थायी मरम्मत की मांग
स्थानीय लोगों ने चमैनिया नदी पर नए पुल के निर्माण या मौजूदा पुल की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है. उनका कहना है कि अस्थायी उपाय से समस्या का समाधान नहीं होगा. पुल की स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था जरूरी है.
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार की गड्ढे की फोटो भेजने पर इनाम देने की योजना भी यहां प्रभावी नहीं दिख रही है. उनका कहना है कि जब तीन साल से पुल की स्थिति सामने है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
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