बेतिया ऑडिटोरियम में 15 जुलाई को गूंजेगी आजादी की गाथा, भोजपुरी नाटक 'फनिया वध' का होगा मंचन

15 जुलाई को बेतिया ऑडिटोरियम में भोजपुरी नाटक 'फनिया वध' का मंचन होगा. यह नाटक चंपारण के स्वतंत्रता आंदोलन और स्थानीय क्रांतिकारियों के अनसुने संघर्षों को जीवंत करेगा. अंग्रेजों के मुखबिर की हत्या और काला पानी की दर्दनाक दास्तान का मंचन किया जाएगा.

Champaran History Play: चंपारण के गौरवशाली क्रांतिकारी इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की अनकही गौरवगाथाओं को मंच पर जीवंत करने के उद्देश्य से एक बड़ा सांस्कृतिक आयोजन होने जा रहा है. आगामी 15 जुलाई की शाम 6:30 बजे बेतिया ऑडिटोरियम में भव्य भोजपुरी नाटक 'फनिया वध' का मंचन किया जाएगा. यह नाटक चंपारण के स्वतंत्रता आंदोलन और देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले स्थानीय क्रांतिकारियों के कड़े संघर्ष पर आधारित है.

अंग्रेजों के मुखबिर की हत्या और काला पानी की दर्दनाक दास्तान

जिले के वरिष्ठ साहित्यकार सह नाटककार डॉ दिवाकर राय ने बताया कि इस विशेष प्रस्तुति में उन ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाया जाएगा, जिनसे आज की युवा पीढ़ी काफी हद तक अनजान है. नाटक के माध्यम से दर्शकों को यह जानने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा कि आखिर बेतिया में अंग्रेजों के एक कुख्यात मुखबिर की सार्वजनिक हत्या क्यों की गई थी. इसके साथ ही चंपारण के किन-किन महान क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने काला पानी की सजा दी थी और इसके पीछे की मुख्य वजहें क्या थीं. इसके अलावा देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई अन्य रोमांचक प्रसंगों को भी इस नाटक के जरिए मंच पर बेहद संजीदगी से प्रस्तुत किया जाएगा.

संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से चंपारण में पहली बार ऐतिहासिक प्रस्तुति

उन्होंने विशेष रूप से बताया कि चंपारण के इतिहास में पहली बार किसी स्थानीय नाटककार की मौलिक रचना का मंचन संगीत नाटक अकादमी और कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बड़े स्तर पर किया जा रहा है. इसे चंपारण के रंगमंच और सांस्कृतिक जगत के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. इस नाटक का निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के जाने-माने निर्देशक हरिशंकर रवि कर रहे हैं. वर्तमान में सभी कलाकारों द्वारा नाटक के मंचन की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं. आयोजकों ने साहित्य, रंगमंच, इतिहास और देश की संस्कृति में गहरी रुचि रखने वाले तमाम प्रबुद्ध लोगों से 15 जुलाई की शाम बेतिया ऑडिटोरियम पहुंचकर इस ऐतिहासिक प्रस्तुति का साक्षी बनने की भावुक अपील की है.


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लेखक के बारे में

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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