Bhikhari Thakur Jayanti: राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान युवा इकाई के तत्वावधान में शुक्रवार को मनुआपुल में लोकनाट्य सम्राट भिखारी ठाकुर की जयंती पर "भोजपुरी साहित्य में भिखारी ठाकुर की भूमिका" विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का संयोजन राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान के राष्ट्रीय युवाध्यक्ष विभांक धर मिश्र ने किया.
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भिखारी ठाकुर समाज की चेतना के प्रतीक
स्वागत संबोधन में विभांक धर मिश्र ने कहा कि भिखारी ठाकुर केवल लोक कलाकार नहीं थे, बल्कि भोजपुरी समाज की चेतना, संघर्ष, सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक अस्मिता के सशक्त प्रतीक थे. उन्होंने युवाओं से भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की.
आज भी समाज का आईना हैं उनकी रचनाएं
मुख्य वक्ता मयंक धर मिश्र ने कहा कि भिखारी ठाकुर भोजपुरी साहित्य के शिखर व्यक्तित्व हैं और उनकी रचनाएं आज भी समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करती हैं.
वहीं राहुल द्विवेदी ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी भाषा को जन-जन तक पहुंचाकर लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई.
मातृभाषा के संरक्षण का संदेश
युवा साहित्यकार विष्णुकांत मिश्रा ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना चाहिए तथा उसके संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
शिक्षक, विद्यार्थी और साहित्यप्रेमी रहे मौजूद
कार्यक्रम में अनमोल रतन, प्रिंस कुमार, पुरुषोत्तम कुमार, विशाल कुमार, जितेंद्र कुमार और प्रतीक कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी और साहित्यप्रेमियों ने भाग लिया. वक्ताओं ने भिखारी ठाकुर के साहित्य और सामाजिक योगदान को आज भी प्रासंगिक बताते हुए उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया.
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