धूमधाम से मनाया गया भैया दूज का पर्व, युवतियों और महिलाओं में दिखा उत्साह

गुरुवार को बहन एवं भाई के प्रेम का प्रतीक पर्व भैया दूज श्रद्धा और परंपरागत तरीके से मनाया गया.

मैनाटांड़. गुरुवार को बहन एवं भाई के प्रेम का प्रतीक पर्व भैया दूज श्रद्धा और परंपरागत तरीके से मनाया गया. भैईया जियस लाखों बरिस हैप्पी भैया चले ले अहेरिया मुस्कान बहिना देहली अशीष हो ना. गोवर्धन पूजा के अवसर पर उक्त गीत गाकर बहनों ने अपने अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना की. बहनें पहले अपने भाइयों को श्राप देती हैं. फिर उसका अफसोस कर रेंगनी के काट से जीभ को चूभोकर भाइयों को लाख बारिश जीने का आशीर्वाद देती हैं. इसके बाद भाई को बजरी एवं मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र के लिए भगवान से कामना करती हैं. ताकि सभी भाई बजड़ी खाकर बजड़ हो जाये. आचार्य सुनील मिश्रा ने बताया कि गोवर्धन पूजा के बाद हिंदू समुदाय में पूजा के आगमन के साथ-साथ बेटियों के हाथ पीले करने का काम शुरू हो जाता है. यह पूजा मांगलिक कार्य शुरू करने की अनुमति देता है. इस अवसर पर महिलाएं श्रृंगार कर जगह-जगह समूह में जाकर बड़े ही उत्साह से गोधन की पूजा अर्चना की. इनरवा प्रतिनिधि के अनुसार मैनाटांड़ प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट का त्योहार गुरुवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया. महिलाएं गोवर्धन की मूसल से कुटाई कर पहले भाइयों को कोसा, फिर उनकी दीर्घायु होने की कामना की. घरों की सफाई कर महिलाओं ने गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा की. पूजा में शामिल महिलाओं ने गोधन की कहानी सुनी. पूजा की रस्म पूरी होने के बाद महिलाओं ने मूसल से गोधन की कुटाई की. इस पूजा से धन, धान्य, संतान और गोरस की वृद्धि होती है. मैनाटांड क्षेत्र में लड़कियों और महिलाओं ने परंपरा के अनुसार सुबह गांव में सार्वजनिक स्थानों पर गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया. प्रखंड क्षेत्र के इनरवा, भंगहा, मानपुर, पुरुषोत्तमपुर, पिरारी, झझरी आदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी गोवर्धन पूजा का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया और गौ माता का पूजन किया. नौतन प्रतिनिधि के अनुसार प्रखंड क्षेत्र में गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ भैया दूज का पर्व संपन्न हुआ.इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार गोवर्धन पूजा करते हुए अपने भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की.पूजा के दौरान बहनों ने मंगल गीत गाते हुए सगून की विधि पूरी की.जीअसू हो मोरा भइया, जीय भइया लाख बरीश हो, जैसे लोकगीतों की मधुर धुनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया.नौतन समेत आसपास के गांवों में सुबह से ही महिलाएं पूजा की तैयारी में जुटी रहीं. बहनों ने गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर उसकी पूजा-अर्चना की और भगवान कृष्ण से अपने भाइयों की रक्षा की प्रार्थना की.पूजा के उपरांत महिलाओं ने आरती उतारी और भाइयों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई.बच्चों और बुजुर्गों की सहभागिता से पर्व का उल्लास और भी बढ़ गया.इस मौके पर महिलाओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का उत्सव मनाया. भैया दूज पर बहनों ने की भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना फोटो 10, कैप्सन : भैया दूज के दौरान महिलाएं व युवतियां बेतिया. गोवर्धन पूजा एवं भैया दूज हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. बेतिया नगर के लाल बाजार, नोनिया टोली, वार्ड नंबर 23 निवासी कलावती देवी लगभग चार दशक से गोवर्धन पूजा का आयोजन एवं संयोजन करती आ रही हैं. शुरु में उन्होंने अपनी सास स्व. राजमती देवी के साथ आयोजन किया. अब उन्हें उनकी बहुएं पिंकी देवी, पूजा देवी, निभा देवी इस कार्य में सहयोग कर रही हैं. इसमें स्थानीय महिलाओं का भी सहयोग मिलता है. कलावती देवी का कहना है कि गोवर्धन पूजा की संस्कृति ने समाज में समरसता को संरक्षित रखा है. आसपास के घरों की सभी उम्र की महिलाएं और युवतियां इस आयोजन में शामिल होती हैं, जो महिलाएं कभी कभार किसी से बात करती हैं वे भी इस अवसर पर एक साथ बैठती हैं और आपस में हाल समाचार करती हैं. अपने से बड़ी महिलाओं का पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं. विवाहित महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं. यह आयोजन ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, छोटे-बड़े के भाव से रहित होता है. बड़ा सुंदर और खुशनुमा माहौल होता है. इस पूजा के बाद ही बजड़ी लेकर महिलाएं अपने भाईयों को बजड़ी खिलाने के लिए प्रस्थान करती है. भाईयों की लंबी आयु और सलामती वाले भैया दूज का त्योहार जग जाहिर है.

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Author: SATISH KUMAR

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