Bettiah News: वैश्विक तनाव और सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री द्वारा सोना न खरीदने की अपील का व्यापक असर पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में देखा जा रहा है. इस अपील ने स्थानीय सर्राफा कारोबारियों, कारीगरों और आम नागरिकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है. जहां छोटे व्यापारियों को अपने रोजगार और परिवार के भविष्य की चिंता सता रही है, वहीं आम महिलाएं इसे महंगाई पर लगाम लगाने के एक अवसर के रूप में देख रही हैं.
कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
स्वर्ण व्यवसायी रामेश्वर सर्राफ का मानना है कि प्रधानमंत्री का फैसला देशहित में है क्योंकि बड़े पूंजीपतियों के निवेश से कीमतें बढ़ रही हैं. हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि खरीदारी कम होने से छोटे दुकानदारों और आभूषण बनाने वाले कारीगरों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार होगा. वहीं, दुकानदार अजय कुमार ने कहा कि सोने की महंगाई ने पहले ही कमर तोड़ रखी है, अब मंदी की आहट से छोटे व्यवसायियों के सामने आर्थिक संकट गहरा जाएगा. उन्होंने सरकार से मध्यम वर्गीय व्यवसायियों के लिए राहत की मांग की है.
महिलाओं को कीमतों में गिरावट की आस
दूसरी ओर, गृहणियों ने इस अपील का स्वागत किया है. स्थानीय निवासी नीलम तिवारी ने कहा कि सामाजिक परंपराओं के लिए सोना जरूरी है, लेकिन जो आभूषण पहले 10 हजार में मिलते थे, उनके दाम अब 25 हजार तक पहुंच गए हैं. महिलाओं को उम्मीद है कि यदि मांग कम होगी, तो कीमतों में गिरावट आएगी और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सोना फिर से पहुंच में होगा.
जमाखोरों पर कार्रवाई की मांग
चीनी मिल के स्वास्थ्य कर्मी नृपेंद्र दुबे ने कहा कि सरकार को उन लोगों पर नकेल कसनी चाहिए जो सोने की जमाखोरी कर रहे हैं. फिलहाल, नरकटियागंज का सर्राफा बाजार असमंजस में है. व्यापारी भविष्य की मंदी को लेकर डरे हुए हैं, तो आम जनता कीमतों के नीचे आने का इंतजार कर रही है.
नरकटियागंज से सतीश कुमार पांडेय की रिपोर्ट
