Bettiah News: भू-माफिया के दबाव में आकर एक विधवा की दशकों पुरानी जमाबंदी निरस्त करने के मामले में बगहा-2 के सीओ सह सहायक बंदोबस्ती पदाधिकारी बृजबिहारी कुमार पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है. जिलाधिकारी तरनजोत सिंह के निर्देश पर एडीएम बेतिया राजीव कुमार सिन्हा ने सीओ से स्पष्टीकरण मांगा है. इस संबंध में मंगलवार को अंचल कार्यालय को पत्र प्राप्त हुआ है. जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए जमाबंदी को तत्काल प्रभाव से पूर्ववत बहाल करने का आदेश दिया है.
क्या है पूरा मामला
मामला पोखरभिंडा गांव की निवासी मनोरमा देवी की जमीन से जुड़ा है. पीड़िता ने 32 वर्ष पूर्व यह भूमि खरीदी थी और तब से उस पर काबिज हैं. मनोरमा देवी का आरोप है कि भू-माफिया के प्रभाव में आकर सीओ बृजबिहारी कुमार और कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश कुमार ने नियमों को ताक पर रखकर उनकी जमाबंदी रद्द कर दी. हैरान करने वाली बात यह है कि यह मामला पहले से एडीएम न्यायालय में लंबित था और 22 अप्रैल को डीसीएलआर के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जा चुकी थी. इसके बावजूद 28 अप्रैल को आनन-फानन में जमाबंदी निरस्त कर दी गई.
डीएम के जनता दरबार में खुला भ्रष्टाचार का खेल
पीड़िता ने सोमवार को डीएम के जनता दरबार में न्याय की गुहार लगाई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम तरनजोत सिंह ने फोन पर ही सीओ को कड़ी फटकार लगाई. जांच में पाया गया कि जमीन की कीमतें बढ़ने के कारण भू-माफिया नए दावेदार खड़े कर जमीन हड़पने की साजिश रच रहे हैं. अंचल और डीसीएलआर कार्यालय की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाते हुए पीड़िता ने जान-माल की सुरक्षा की भी मांग की है.
सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है जमीन का विवाद
बता दें कि वर्ष 2007 में इस भूमि को पुलिस लाइन निर्माण के लिए अधिग्रहित करने की अधिसूचना जारी हुई थी. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहण निरस्त कर जमीन रैयतों को लौटाने का आदेश दिया था.
अब जब जमीन वापस मिली, तो अंचल कार्यालय की मिलीभगत से भू-माफिया सक्रिय हो गए हैं. डीएम ने आश्वासन दिया है कि दोषियों पर स्पष्टीकरण के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पीड़िता को न्याय दिलाया जाएगा.
बगहा से चंद्रप्रकाश आर्या की रिपोर्ट
